Tech News: भारत में अब बिना मोबाइल नेटवर्क के भी फोन पर खुलकर बातें हो सकेंगी। केंद्र सरकार देश में डायरेक्ट-टू-डिवाइस (D2D) सैटेलाइट कनेक्टिविटी लाने की बड़ी तैयारी कर रही है। इस क्रांतिकारी टेक्नोलॉजी की मदद से आपके स्मार्टफोन सीधे सैटेलाइट से कनेक्ट हो सकेंगे।
गूगल और ऐप्पल ने सरकार से मांगी सफाई
भारत सरकार इस समय इस नई टेक्नोलॉजी को देश में लागू करने के लिए बड़ी कंपनियों से बातचीत कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दिग्गज टेक कंपनी ऐप्पल और गूगल ने सरकार से कुछ तकनीकी नियमों पर और ज्यादा स्पष्टता मांगी है ताकि वे अपनी सेवाएं दे सकें।
ऐप्पल और गूगल के अलावा दुनिया की दूसरी बड़ी कंपनियों ने भी इस विषय पर अपने आधिकारिक जवाब सरकार को सौंप दिए हैं। भारत जैसे विशाल देश के लिए यह सैटेलाइट कनेक्टिविटी बेहद उपयोगी साबित हो सकती है क्योंकि यहां कई दुर्गम इलाके मौजूद हैं।
देश के कई पहाड़ी रास्तों, दूरदराज के सीमावर्ती जिलों और घने जंगलों में आज भी मोबाइल नेटवर्क की बड़ी समस्या बनी हुई है। इन मुश्किल जगहों पर मोबाइल टावर लगाना कंपनियों के लिए बेहद कठिन और बहुत ज्यादा खर्चीला साबित होता है।
दूरदराज के इलाकों में खुलेंगे तरक्की के रास्ते
ऐसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में सैटेलाइट कनेक्टिविटी लोगों के जीवन को पूरी तरह बदल देगी। इसके आने से रिमोट इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई आसान हो जाएगी। साथ ही स्थानीय लोग वहां बैठकर अपना बिजनेस भी आसानी से कर सकेंगे।
दूरसंचार विभाग इस समय सभी टेक कंपनियों के साथ लगातार अनौपचारिक बैठकें कर रहा है। सरकार इस टेक्नोलॉजी की संभावनाओं और इसकी सीमाओं को बारीकी से समझ रही है। इससे भविष्य में इस सेवा के लिए बेहतर नियम बनाने में मदद मिलेगी।
बैटरी और एंटीना को लेकर कंपनियों को चिंता
इस नई तकनीक को लेकर मोबाइल कंपनियों ने सरकार के सामने कई बड़ी चुनौतियां रखी हैं। उनकी सबसे बड़ी चिंता फोन की बैटरी लाइफ को लेकर है। सैटेलाइट से जुड़ने के लिए फोन को मोबाइल नेटवर्क के मुकाबले बहुत ज्यादा पावर की जरूरत होती है।
ज्यादा पावर इस्तेमाल होने के कारण स्मार्टफोन की बैटरी बहुत जल्दी डिस्चार्ज हो सकती है। इसके अलावा सैटेलाइट से सिग्नल पकड़ने के लिए फोन के अंदर एक विशेष एंटीना लगाने की जरूरत पड़ेगी, जिससे फोन का साइज थोड़ा बढ़ सकता है।
आजकल सभी स्मार्टफोन कंपनियां अपने फोन को ज्यादा से ज्यादा पतला और स्लिम बनाने पर ध्यान दे रही हैं। ऐसे में फोन के भीतर नया हार्डवेयर फिट करने की गुंजाइश बहुत कम है। कंपनियों ने भारत के मुश्किल मौसम को लेकर भी चिंता जताई है।
Author: Mohit

