Delhi News: क्रिकेट के मैदान पर अपनी रफ्तार से बल्लेबाजों के होश उड़ाने वाले दिल्ली के युवा तेज गेंदबाज प्रिंस यादव का सपना सच हो गया है। अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाली तीन मैचों की वनडे सीरीज के लिए उनका चयन भारतीय टीम में हुआ है। प्रिंस की यह कामयाबी उनके वर्षों के कड़े संघर्ष और अटूट जुनून का परिणाम है।
एक समय था जब क्रिकेट के प्रति दीवानगी के कारण प्रिंस को घर पर डांट खानी पड़ती थी। सुबह पांच बजे घर से निकलना और देर रात नौ-दस बजे लौटना मां की चिंता का कारण बनता था। परिवार को डर था कि प्रिंस पढ़ाई से दूर हो रहे हैं। मां की नाराजगी इतनी बढ़ गई थी कि एक दिन उन्हें घर में भी कैद करने की कोशिश हुई थी।
संघर्ष से कामयाबी तक का सफर
क्रिकेट के प्रति प्रिंस का जुनून किसी भी बाधा से बड़ा था। डांट और सख्ती के बावजूद वह अगले ही दिन मैदान पर अभ्यास के लिए पहुंच जाते थे। 17 साल की उम्र तक उन्होंने टेनिस बॉल क्रिकेट खेला और बतौर बल्लेबाज अपनी पहचान बनाई। हालांकि, उनके पिता, जो खुद एक तेज गेंदबाज रह चुके थे, ने बेटे के भीतर छिपे असली हुनर को पहचाना।
प्रिंस के करियर में बड़ा मोड़ तब आया जब पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज प्रदीप सांगवान ने उन्हें नजफगढ़ के एक मैदान पर गेंदबाजी करते देखा। सांगवान ने उनकी प्रतिभा को परखकर उन्हें सही दिशा में कोचिंग लेने की सलाह दी। इसके बाद कोच अमित वशिष्ठ के मार्गदर्शन में प्रिंस ने अपनी गेंदबाजी की बारीकियों को सुधारना शुरू किया।
घरेलू क्रिकेट में दिखाई धार
गांव के तालाब के पास बनी पिच पर घंटों पसीना बहाने वाले प्रिंस की मेहनत रंग लाई। दिल्ली प्रीमियर लीग और घरेलू क्रिकेट में उन्होंने अपनी गति और सटीक लाइन-लेंथ से चयनकर्ताओं को खूब प्रभावित किया। लखनऊ सुपर जायंट्स के साथ जुड़ने और भरत अरुण जैसे दिग्गज कोच के सानिध्य ने उनके खेल को एक नई ऊंचाई दी है।
आज जिस बेटे के लिए मां रात भर जागकर चिंता करती थीं, वही बेटा नीली जर्सी पहनकर देश का प्रतिनिधित्व करने जा रहा है। प्रिंस यादव का चयन दिल्ली के युवा क्रिकेटरों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। अब पूरा परिवार और उनका गांव इस ऐतिहासिक पल का जश्न मनाने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
Author: Raj Thakur


