Beijing News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की हालिया चीन यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में एक सकारात्मक मोड़ देखने को मिला है। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने बुधवार को औपचारिक रूप से अमेरिका से 200 बोइंग विमान खरीदने के सौदे की पुष्टि की है। यह डील दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
मंत्रालय ने बताया कि दोनों देश नवंबर में समाप्त होने वाले व्यापारिक समझौते (ट्रेड ट्रूस) को आगे बढ़ाने पर गहन चर्चा कर रहे हैं। साथ ही, लगभग 30 अरब डॉलर के सामान पर आपसी टैरिफ में कटौती के लिए एक नई रूपरेखा तैयार की जा रही है। यह घोषणा ट्रंप और शी चिनफिंग के बीच पिछले शुक्रवार को हुई सफल शिखर वार्ता के बाद सामने आई है।
बोइंग सौदे का महत्व और चुनौतियां
यह बोइंग सौदा ट्रंप और शी चिनफिंग की मुलाकात का सबसे ठोस परिणाम है। हालांकि, बाजार की उम्मीदें 500 विमानों की बिक्री की थीं, जिससे बोइंग के शेयरों में शुरुआती उतार-चढ़ाव दिखा। 2017 में ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान शुरू हुए व्यापार युद्ध और 2019 में बोइंग 737 मैक्स दुर्घटनाओं के बाद से चीन में बोइंग की बिक्री लगभग ठप हो गई थी, जिसे अब नई गति मिल रही है।
चीन दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा विमानन बाजार है। बोइंग के अनुमान के अनुसार, अगले दो दशकों में चीन को लगभग 9,000 नए विमानों की जरूरत होगी। 2018 के बाद से चीन को महज 49 जेट बेचे जा सके थे, ऐसे में 200 विमानों का यह नया ऑर्डर बोइंग के लिए एक बहुत बड़ी व्यावसायिक वापसी है। दोनों देश इस साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का प्रयास कर रहे हैं।
भविष्य की कूटनीतिक और आर्थिक रूपरेखा
विमान सौदे के अलावा, चीन ने कृषि उत्पादों के व्यापार को बढ़ाने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में ‘रेयर अर्थ’ (दुर्लभ खनिजों) की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने का भी भरोसा दिया है। हालांकि, इन लक्ष्यों को कैसे हासिल किया जाएगा, इस पर अभी विवरण स्पष्ट नहीं है। दोनों पक्ष अब नए व्यापार और निवेश बोर्ड को अंतिम रूप देने पर काम कर रहे हैं, जो भविष्य के आर्थिक सहयोग का आधार बनेंगे।
कूटनीतिक स्तर पर भी यह यात्रा काफी सफल रही है। ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग को सितंबर में अमेरिका आने का आधिकारिक न्योता दिया है, जिसे द्विपक्षीय संबंधों में सुधार के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। यदि यह गति बनी रहती है, तो आने वाले समय में अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक जटिलताएं काफी हद तक कम होने की उम्मीद है।
Author: Rajesh Kumar


