भीषण हीटवेव के बीच भारत ने बनाया बिजली सप्लाई का ऐतिहासिक रिकॉर्ड, पड़ोसी देशों से पांच गुना अधिक लोड संभाला

Delhi News: देश का एक बड़ा हिस्सा इस समय भीषण गर्मी और जानलेवा हीटवेव की चपेट में है। इस झुलसाती गर्मी के बीच भारत की बिजली खपत अपने नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। ऊर्जा मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, राष्ट्रीय पावर ग्रिड ने भारी मांग के बीच अपनी कार्यकुशलता साबित की है।

बिजली मंत्रालय ने बताया कि मंगलवार को दोपहर बाद 3:40 बजे पीक ऑवर में देश की बिजली मांग 260.45 गीगावॉट तक पहुंच गई। ग्रिड ने इस विशाल मांग को बिना किसी रुकावट के सफलतापूर्वक पूरा किया। इससे पहले सोमवार को भी 257.37 गीगावॉट की मांग को आसानी से पूरा किया गया था।

देश के कई राज्यों में पारा 45 डिग्री सेल्सियस के पार जा चुका है। लोग घरों और दफ्तरों में लगातार एसी, कूलर और पंखे चला रहे हैं। इसी वजह से दिन के समय कूलिंग की जरूरत बहुत बढ़ गई है। अत्यधिक मांग के बावजूद हमारे नेशनल ग्रिड ने कमाल की स्थिरता दिखाई है।

पड़ोसी देशों की कुल मांग से पांच गुना आगे

भारत अपने पड़ोसी मुल्कों से केवल क्षेत्रफल और आबादी में ही बड़ा नहीं है, बल्कि ऊर्जा खपत में भी उनसे कोसों आगे है। दक्षिण एशिया के सभी प्रमुख देशों की संयुक्त पीक डिमांड को मिला लें, तो भी भारत अकेले उन पर भारी पड़ता नजर आता है।

आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान की अधिकतम बिजली मांग 28.3 गीगावॉट और बांग्लादेश की 16.5 गीगावॉट है। वहीं श्रीलंका की 3 गीगावॉट, नेपाल की 2.2 गीगावॉट, भूटान की 1.2 गीगावॉट और अफगानिस्तान की बिजली मांग केवल 0.8 गीगावॉट है। इन सभी देशों की कुल मांग सिर्फ 52 गीगावॉट है।

इसका सीधा मतलब यह हुआ कि भारत का पावर ग्रिड इस समय अपने सभी पड़ोसी देशों की कुल मांग से पांच गुना अधिक लोड अकेले संभाल रहा है। यह आंकड़ा भारतीय ग्रिड की मजबूत क्षमता, आधुनिक तकनीकी विकास और उसकी बेहतरीन कार्यकुशलता को पूरी दुनिया के सामने मजबूती से प्रदर्शित करता है।

सौर ऊर्जा ने निभाई बिजली आपूर्ति में बड़ी भूमिका

इस रिकॉर्ड मांग को पूरा करने में रिन्यूएबल एनर्जी यानी नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों ने सबसे बड़ा योगदान दिया है। पीक आवर्स के दौरान कुल उत्पादन में अकेले सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी 21 प्रतिशत से अधिक रही। सोलर पैनलों के माध्यम से ग्रिड को रिकॉर्ड 56,204 मेगावाट बिजली मिली।

इसके अलावा पनबिजली परियोजनाओं से 11,422 मेगावाट और पवन ऊर्जा से 4,897 मेगावाट बिजली ग्रिड को प्राप्त हुई। परमाणु ऊर्जा संयंत्रों ने भी अपना योगदान देते हुए 6,293 मेगावाट बिजली पैदा की। यह कुल आपूर्ति का लगभग 2.4 प्रतिशत हिस्सा था, जबकि गैस आधारित संयंत्रों से 5,205 मेगावाट बिजली मिली।

बिजली की इस रिकॉर्ड मांग को थर्मल, हाइड्रो, न्यूक्लियर, गैस, विंड और सोलर ऊर्जा स्रोतों के बेहतरीन मिश्रण से पूरा किया गया। ऊर्जा के इस विविधीकरण की वजह से ही भीषण गर्मी और संकट के बावजूद देश के किसी भी हिस्से में ग्रिड फेल नहीं हुआ और स्थिरता बनी रही।

Author: Rajesh Kumar

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