बदल गई पश्चिम एशिया की बाजी? अमेरिका ने ईरानी तेल से अचानक हटाया प्रतिबंध, जानें पर्दे के पीछे की पूरी कहानी

World/International: पश्चिम एशिया के भीषण युद्ध के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार से एक बेहद चौंकाने वाली खबर आ रही है। ईरान की सरकारी मीडिया ने दावा किया है कि अमेरिका ने ईरानी तेल की बिक्री पर लगे कड़े प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से हटा दिया है। वाशिंगटन के इस बड़े फैसले से दुनिया भर में खलबली मच गई है।

ईरानी मीडिया एजेंसी तस्नीम के अनुसार, दोनों देशों के बीच जारी शांति प्रयासों के तहत अमेरिकी सरकार ने यह कदम उठाया है। तेहरान प्रशासन अब वाशिंगटन पर सभी प्रतिबंधों को हमेशा के लिए हटाने का दबाव बना रहा है। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन ने भविष्य में दोबारा प्रतिबंध न लगाने की कोई लिखित गारंटी अभी तक नहीं दी है।

प्रतिबंध हटने से भारत और चीन को होगा बड़ा मुनाफा

ईरान का यह बड़ा दावा अभी पूरी तरह एकतरफा माना जा रहा है। व्हाइट हाउस या अमेरिकी विदेश मंत्रालय की तरफ से इस फैसले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। युद्ध के इस संवेदनशील दौर में प्रतिबंधों का हटना वैश्विक तेल राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है।

इससे पहले भी अमेरिका ने ईंधन संकट को कम करने के लिए रूस और ईरान के तेल पर से आंशिक रोक हटाई थी। इस नीतिगत बदलाव से भारत और चीन जैसे बड़े तेल आयातक देशों को बहुत सीधा फायदा पहुंचा था। अमेरिकी दबाव के कारण साल 2019 में भारत ने ईरान से तेल खरीदना बंद कर दिया था।

वैश्विक समीकरण बदलने के बाद भारत ने साल 2026 में युद्ध के दौरान ईरान से दोबारा रिकॉर्ड तेल आयात किया। भारतीय विदेश नीति का यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक बहुत साहसिक फैसला माना गया। इस व्यापारिक रिश्ते से भारतीय तेल कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच काफी बड़ी राहत मिली थी।

डोनाल्ड ट्रंप की तेहरान को सीधी और आखिरी चेतावनी

राजनयिक सूत्रों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता के लिए पाकिस्तान इस समय मध्यस्थ की मुख्य भूमिका निभा रहा है। इस्लामाबाद के जरिए ही दोनों कट्टर दुश्मन देशों के बीच कूटनीतिक प्रस्तावों की लगातार अदला-बदली हो रही है। हाल ही में अमेरिका ने तेहरान को अपना एक पांच सूत्रीय शांति प्रस्ताव भी भेजा था।

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को बहुत कड़े शब्दों में एक खुली चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा कि ईरानी नेतृत्व के पास शांति समझौते पर फैसला लेने के लिए समय अब तेजी से खत्म हो रहा है। यदि तेहरान ने सही समय पर उचित निर्णय नहीं लिया, तो उनके पास कुछ नहीं बचेगा।

इस पूरे भीषण संकट की शुरुआत अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के सैन्य ठिकानों पर किए गए संयुक्त हमलों से हुई थी। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया और होर्मुज स्ट्रेट जलमार्ग को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया था। इस नाकेबंदी के कारण ही दुनिया में बड़ा तेल संकट पैदा हुआ था।

Author: Pallavi Sharma

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