World News: मध्य-पूर्व में जारी भीषण युद्ध के बीच ईरान अब पूरी दुनिया का इंटरनेट ठप करने की तैयारी में है। तेहरान रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के नीचे बिछी सब-सी इंटरनेट केबल्स पर नजर गड़ाए हुए है। वह दिग्गज वैश्विक टेक कंपनियों से इसके इस्तेमाल के बदले मोटी रकम वसूलना चाहता है।
वैश्विक टेक कंपनियों पर भारी टैक्स लगाने की योजना
ईरानी मीडिया के मुताबिक सरकार ने इन सबमरीन केबल्स को निशाना बनाने की बड़ी योजना बनाई है। ये केबल अरब देशों को यूरोप और एशिया से जोड़ते हैं। ईरान चाहता है कि गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, मेटा और अमेजन जैसी दिग्गज कंपनियां उसके कड़े कानूनों का पालन करें और उन्हें भारी लाइसेंस फीस भी दें।
पूरी दुनिया के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर मंडराया खतरा
इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन के अनुसार ये सब-सी केबल्स दुनिया के लगभग 99 प्रतिशत इंटरनेट ट्रैफिक को संभालते हैं। यदि ईरान इन केबल्स को किसी भी तरह का नुकसान पहुंचाता है, तो वैश्विक स्तर पर इंटरनेट धीमा हो जाएगा। इससे अंतरराष्ट्रीय ई-कॉमर्स और डिजिटल बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह ठप हो सकती हैं।
खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था को लग सकता है बड़ा झटका
होर्मुज के नीचे बिछे मुख्य केबलों में ‘एशिया-अफ्रीका-यूरोप 1’ और ‘फाल्कन नेटवर्क’ शामिल हैं। इनसे संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब जैसे देश जुड़े हैं। इन देशों ने हाल ही में एआई और डिजिटल बुनियादी ढांचे में अरबों डॉलर का निवेश किया है। केबलों में खराबी से इनकी राष्ट्रीय कंपनियां सीधे प्रभावित होंगी।
क्या सैटेलाइट बन सकता है इंटरनेट का मजबूत विकल्प?
विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्र के नीचे बिछे केबल्स के क्षतिग्रस्त होने पर भी इंटरनेट कनेक्टिविटी पूरी तरह खत्म नहीं होगी। हालांकि हमारे पास जमीन पर आधारित लिंक और सैटेलाइट सिस्टम मौजूद हैं। इसके बावजूद सैटेलाइट सिस्टम सबमरीन केबल्स जितना भारी डेटा ट्रैफिक संभालने में सक्षम नहीं हैं और बेहद महंगे भी हैं।
ईरान के इस नए कदम से पश्चिमी देशों और एशिया के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण टेक कंपनियों के लिए ईरान को कोई भी भुगतान करना कानूनी रूप से असंभव है। ऐसे में यदि टेक कंपनियों ने फीस नहीं दी, तो ईरान इस महत्वपूर्ण जलमार्ग में इंटरनेट यातायात बाधित कर सकता है।
Author: Pallavi Sharma

