Washington News: ईरान के मिनाब स्थित एक स्कूल पर हुए घातक हमले की जांच अब अंतिम चरण में है। इस घटना में 175 से अधिक बच्चों और शिक्षकों की मौत हुई थी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की सशस्त्र सेवा समिति के समक्ष गवाही देते हुए इस मामले को अत्यंत ‘जटिल’ बताया है।
यह मामला 28 फरवरी का है, जब मिनाब में हुए एक हमले में बड़ी संख्या में नागरिकों की जान गई थी। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती आंतरिक जांच में संकेत मिले थे कि इसके लिए अमेरिकी सेना जिम्मेदार हो सकती है। हालांकि, पेंटागन ने अब तक इस पर कोई आधिकारिक अंतिम निष्कर्ष स्वीकार नहीं किया है, जिससे सांसदों के बीच नाराजगी है।
हमले की जटिलता का कारण
एडमिरल कूपर ने स्पष्ट किया कि यह हमला पिछले मामलों से इसलिए अलग है क्योंकि यह स्कूल इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के एक सक्रिय क्रूज मिसाइल बेस के भीतर स्थित था। उन्होंने बताया कि लक्ष्य निर्धारित करने में संभवतः पुरानी खुफिया जानकारी का उपयोग किया गया, जिसके कारण यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति उत्पन्न हुई।
सशस्त्र सेवा समिति के शीर्ष डेमोक्रेट सदस्य एडम स्मिथ ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि घटना के 80 दिन बाद भी जिम्मेदारी न स्वीकार करना चिंताजनक है। समिति के सामने उन्होंने पिछली कार्यप्रणाली का हवाला दिया, जहाँ पेंटागन जांच पूरी होने से पहले ही त्वरित जिम्मेदारी स्वीकार करता रहा है।
युद्ध के नियमों और ईरान की भूमिका पर बहस
समिति में अमेरिकी सेना की पारदर्शिता और युद्ध के नियमों (Rules of Engagement) पर लंबी चर्चा हुई। एडमिरल कूपर ने जोर देकर कहा कि अमेरिकी सेना कभी भी नागरिकों को निशाना नहीं बनाती और वे अपनी गलतियों को स्वीकार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। वहीं, रिपब्लिकन सांसदों ने ईरान द्वारा क्षेत्र में किए जा रहे नागरिक हमलों का मुद्दा उठाया।
कूपर ने जानकारी दी कि फरवरी में संघर्ष शुरू होने के बाद से ईरान ने मध्य पूर्व में नागरिक इलाकों पर 1,000 से अधिक हमले किए हैं, जिसमें 300 से अधिक नागरिक मारे गए हैं। इसके अलावा, ईरान के भीतर भी विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए हजारों नागरिकों की हत्या और दर्जनों को फांसी दिए जाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
Author: Pallavi Sharma


