शी-पुतिन की ‘अटूट’ दोस्ती: ट्रंप के दौरे के बाद बीजिंग में रूस-चीन की रणनीतिक साझेदारी का नया अध्याय

Beijing News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की चीन यात्रा के ठीक बाद बीजिंग में एक नई कूटनीतिक तस्वीर उभरकर सामने आई है। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भव्य स्वागत किया। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक राजनीति यूक्रेन युद्ध और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच एक नए मोड़ पर है। दोनों नेताओं ने अपने संबंधों को पहले से अधिक मजबूत बताया है।

बैठक में शी चिनफिंग और पुतिन ने खुद को ‘बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था’ के समर्थक के रूप में पेश किया। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के दौरे के तुरंत बाद पुतिन को बीजिंग बुलाना चीन की सोची-समझी रणनीति है। शी ने एकतरफा और वर्चस्ववादी प्रवृत्तियों की आलोचना की, जिसे अमेरिका की वैश्विक नीतियों पर सीधा निशाना माना जा रहा है।

ऊर्जा और तकनीकी सहयोग पर बड़ा जोर

रूस और चीन के संबंधों की सबसे बड़ी ताकत अब उनकी एनर्जी डील बन चुकी है। यूक्रेन युद्ध के बाद से चीन रूस का सबसे बड़ा आर्थिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच व्यापार पिछले साल 228 अरब डॉलर तक पहुँच गया है। पुतिन ने ऊर्जा सहयोग को आर्थिक रिश्तों का इंजन बताया। रूस ने भरोसा दिलाया है कि तनाव के बावजूद चीन को तेल और गैस की आपूर्ति जारी रहेगी।

ऊर्जा के अलावा दोनों देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और एडवांस टेक्नोलॉजी में भी साझेदारी बढ़ाने पर सहमति जताई है। पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण रूस अब चीनी तकनीक और सेमीकंडक्टर सपोर्ट पर पहले से कहीं ज्यादा निर्भर हो गया है। दोनों देशों का यह एकीकरण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर गहरा असर डाल रहा है।

‘पावर ऑफ साइबेरिया-2’ पर अभी भी सस्पेंस

बैठक में बहुप्रतीक्षित ‘पावर ऑफ साइबेरिया-2’ गैस पाइपलाइन पर भी चर्चा हुई, लेकिन कोई अंतिम समझौता नहीं हो सका। रूस इसे जल्द से जल्द पूरा करना चाहता है क्योंकि यूरोप में उसकी गैस की मांग घट गई है। वहीं, चीन अपने आर्थिक हितों को लेकर फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। हालांकि दोनों पक्षों ने इसे अंतिम रूप देने की दिशा में सकारात्मक संकेत दिए हैं।

दोनों नेताओं ने यूक्रेन युद्ध पर भी अपनी एकजुटता दिखाई है। उन्होंने जोर दिया कि युद्ध का समाधान केवल बातचीत से ही संभव है। साथ ही, दोनों देशों ने अमेरिका की ‘गोल्डन डोम’ मिसाइल डिफेंस योजना पर भी आपत्ति जताई है। उनका मानना है कि यह वैश्विक रणनीतिक संतुलन को बिगाड़ सकती है और दुनिया को फिर से हथियारों की होड़ की ओर धकेल सकती है।

Author: Pallavi Sharma

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