World News: अमेरिका और ईरान के बीच जारी भारी तनाव को शांत करने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाने की पाकिस्तान की कोशिशों को एक बहुत बड़ा झटका लगा है। एक शक्तिशाली अमेरिकी सीनेटर ने क्षेत्रीय कूटनीति में पाकिस्तान की विश्वसनीयता और उसकी मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अमेरिका के वरिष्ठ रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने खुलेआम चेतावनी देते हुए कहा है कि इजरायल के प्रति इस्लामाबाद की दीर्घकालिक शत्रुता बेहद चिंताजनक है। पश्चिम एशिया में तेजी से बढ़ते तनाव के बीच किसी भी कूटनीतिक बातचीत में पाकिस्तान की भूमिका पूरी तरह से विवादास्पद और संदेहास्पद साबित होती है।
सीनेटर ग्राहम ने दोटूक शब्दों में कहा कि एक निष्पक्ष मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की वर्तमान स्थिति बेहद समस्याग्रस्त नजर आती है। उन्होंने इस्लामाबाद पर एक बेहद संगीन आरोप लगाते हुए दावा किया कि इस समय पाकिस्तानी सैन्य हवाई अड्डों पर ईरान के लड़ाकू विमानों को सुरक्षित रखा जा रहा है।
रिपब्लिकन सीनेटर ने वरिष्ठ पाकिस्तानी नेताओं द्वारा इजरायल के खिलाफ हाल ही में की गई तीखी टिप्पणियों का हवाला देते हुए उन्हें वैश्विक शांति के लिए बड़ा खतरा बताया। उन्होंने तेहरान से जुड़ी किसी भी भावी वार्ता में इस्लामाबाद की पूर्ण तटस्थता पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के बयान से भड़का अमेरिका
सीनेटर का यह तीखा बयान पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ द्वारा ट्रंप के ऐतिहासिक अब्राहम समझौते में शामिल होने के आह्वान को सिरे से खारिज करने के बाद सामने आया है। ग्राहम ने कहा कि ये आधिकारिक बयान पाकिस्तानी नेतृत्व में गहरे तक जमी इजरायल विरोधी भावना को दर्शाते हैं।
दक्षिण कैरोलिना के सीनेटर ने कहा कि रक्षा मंत्री ने साफ कहा था कि पाकिस्तान इस समझौते में कभी शामिल नहीं होगा क्योंकि उन्हें इजरायल पर बिल्कुल भरोसा नहीं है। यह वीडियो भले ही थोड़ा पुराना हो, लेकिन मुझे डर है कि उनके मन में यह कड़वी भावना आज भी पूरी तरह से ताजा है।
ग्राहम ने पाकिस्तान सरकार से मांग की है कि वह ट्रंप द्वारा मुस्लिम बहुल देशों से अब्राहम समझौते में शामिल होने के आह्वान पर अपनी आधिकारिक और स्पष्ट स्थिति दुनिया के सामने रखे। पाकिस्तान अपनी दोहरी नीति के कारण वैश्विक मंचों पर लगातार अलग-थलग पड़ता जा रहा है।
पाकिस्तान की मौलिक विचारधारा के विपरीत है यह समझौता
दरअसल, एक अंतरराष्ट्रीय साक्षात्कार के दौरान ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने अब्राहम समझौते का हिस्सा बनने की पाकिस्तान की हर संभावना को खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा था कि इस्लामाबाद को किसी भी ऐसे समझौते में शामिल नहीं होना चाहिए जो देश की मौलिक और धार्मिक विचारधाराओं के विपरीत हो।
इजरायल की साख पर सीधे सवाल उठाते हुए पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने यहां तक कह दिया था कि ऐसे देश पर एक दिन के लिए भी भरोसा नहीं किया जा सकता है। उनके इस आक्रामक रुख के बाद से ही अमेरिका के रणनीतिक हलकों में पाकिस्तान को लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है।
गौरतलब है कि अमेरिका की विशेष मध्यस्थता से साल 2020 में हुए प्रसिद्ध अब्राहम समझौते के कारण इजरायल और कई बड़े अरब देशों के बीच कूटनीतिक संबंध पूरी तरह सामान्य हो गए थे। इस ऐतिहासिक कदम से पश्चिम एशिया में राजनयिक और सुरक्षा के समीकरण पूरी तरह बदल गए थे।
Author: Pallavi Sharma

