World News: आज के डिजिटल युग में बच्चों को तकनीक से दूर रखना नामुमकिन है। पढ़ाई से लेकर मनोरंजन तक मोबाइल उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। लेकिन स्क्रीन का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है।
हाल ही में मार्च २०२५ में पब्लिश एक शोध में ३ से ७ साल के बच्चों की डिजिटल आदतों का अध्ययन किया गया। वैज्ञानिकों ने पाया कि ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों की नींद, खेलकूद और दैनिक दिनचर्या को बुरी तरह प्रभावित करता है। इससे बच्चों में चिड़चिड़ापन बढ़ता है।
सिंगापुर के प्रधानमंत्री ने शुरू किया विशेष जागरूकता अभियान
सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने बच्चों में स्वस्थ डिजिटल आदतें डालने के लिए ‘स्क्रीन स्मार्ट फ्रॉम द स्टार्ट’ अभियान शुरू किया है। उन्होंने माता-पिता और स्कूलों से मिलकर बच्चों के लिए एक सुरक्षित और बेहतर डिजिटल माहौल तैयार करने की पुरजोर अपील की है।
लॉरेंस वोंग ने पारिवारिक समय को पूरी तरह स्क्रीन-मुक्त रखने की सलाह दी है। उनके मुताबिक भोजन की मेज पर या परिवार के साथ बैठते समय मोबाइल को दूर रखना चाहिए। जब हर सदस्य स्क्रीन में व्यस्त रहता है, तो आपसी संवाद और भावनात्मक जुड़ाव कमजोर होता है।
बच्चों के बेडरूम को रखें पूरी तरह मोबाइल फ्री
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बच्चों के बेडरूम को पूरी तरह मोबाइल-फ्री रखने की बेहद महत्वपूर्ण सलाह दी है। अगर छोटे बच्चों के कमरे में रात को फोन रहेगा, तो वे देर तक स्क्रीन देखेंगे। इससे उनकी नींद खराब होगी जो उनके विकास के लिए नुकसानदेह है।
अभिभावकों को बच्चों को स्मार्टफोन देने में बिल्कुल जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। अगर सिर्फ संपर्क करने के लिए फोन जरूरी हो, तो शुरुआत में साधारण कीपैड फोन ही दें। इससे बच्चे धीरे-धीरे और जिम्मेदारी के साथ तकनीक का सही इस्तेमाल करना आसानी से सीख जाते हैं।
Author: Pallavi Sharma


