World News: दुनिया भर में बढ़ता वायु प्रदूषण मानव स्वास्थ्य के लिए सबसे गंभीर संकट बन चुका है। यह केवल पर्यावरण का सामान्य मुद्दा नहीं है। खराब हवा सीधे हमारे फेफड़ों, दिल, दिमाग और मासूम बच्चों के शारीरिक विकास पर बेहद बुरा और जानलेवा असर डाल रही है।
इसी गंभीर वजह से हर साल वैश्विक स्तर पर एयर क्वालिटी रिपोर्ट जारी की जाती है। यह रिपोर्ट देशों को प्रदूषण से निपटने का आईना दिखाती है। नवीनतम वैश्विक आंकड़ों के अनुसार पड़ोसी देश पाकिस्तान दुनिया का सबसे अधिक प्रदूषित देश बन गया है।
जानिए प्रदूषण के मामले में शीर्ष तीन देशों का हाल
ताजा रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान का औसत पीएम२.५ स्तर दुनिया में सबसे अधिक दर्ज किया गया है। प्रदूषण की इस वैश्विक सूची में बांग्लादेश दूसरे नंबर पर है। इसके बाद तीसरे स्थान पर मध्य एशियाई देश ताजिकिस्तान का नाम आता है।
अगर क्रमवार देखें तो पाकिस्तान, बांग्लादेश और ताजिकिस्तान दुनिया के सबसे खराब हवा वाले देश हैं। दक्षिण एशिया के इन देशों में तेजी से बढ़ता शहरीकरण, वाहनों का बेकाबू धुआं, पुराने डीजल इंजन और ट्रैफिक जाम हवा को लगातार जहरीला बना रहे हैं।
जानिए आखिर क्या होता है खतरनाक पीएम२.५ कण
प्रदूषण के जानलेवा असर को समझने के लिए पीएम२.५ को जानना बेहद जरूरी है। ये हवा में तैरने वाले बहुत ही महीन और सूक्ष्म कण होते हैं। इनका आकार हमारे सिर के बाल से भी लगभग तीस गुना छोटा होता है।
ये सूक्ष्म कण सांस के जरिए सीधे इंसानी फेफड़ों और खून के प्रवाह में मिल जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक स्वस्थ जीवन के लिए इसकी मात्रा ५ से अधिक नहीं होनी चाहिए। पाकिस्तान में यह सुरक्षित सीमा से १३ गुना अधिक हो चुकी है।
वैश्विक सूची में भारत किस पायदान पर खड़ा है
दुनिया भर के देशों की तुलनात्मक रिपोर्ट में भारत इस बार छठे स्थान पर आया है। भारतीय नागरिकों के लिए यह थोड़ी राहत की बात है कि देश शीर्ष पांच प्रदूषित देशों की सूची से बाहर निकलने में पूरी तरह सफल रहा है।
हालांकि भारत के लिए भी अभी जश्न मनाने का समय नहीं आया है। दिल्ली-एनसीआर सहित देश के कई बड़े औद्योगिक क्षेत्र और छोटे शहर अब भी खतरनाक स्मॉग का सामना कर रहे हैं। यहां गाड़ियों की संख्या और फैक्ट्रियों का धुआं मुख्य विलेन है।
सर्दियों के मौसम में बढ़ जाती है असली आफत
भारत में सड़क निर्माण, उड़ती धूल और खुले में कचरा जलाना भी प्रदूषण का बड़ा कारण है। उत्तर भारत के राज्यों में सर्दियों के दौरान पराली जलाने से हवा की गुणवत्ता बेहद गंभीर श्रेणी में पहुंच जाती है। मौसमी बदलाव भी प्रदूषण बढ़ाते हैं।
सर्दियों में भारी और ठंडी हवा नीचे ही ठहर जाती है। इस वजह से जहरीला धुआं और धूल के कण वायुमंडल में फैलने के बजाय जमीन के पास जमा हो जाते हैं। यह स्थिति बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए सांस लेना दूभर कर देती है।
इस वैश्विक समस्या का क्या है स्थाई समाधान
वायु प्रदूषण को कम करना थोड़ा मुश्किल जरूर है, लेकिन इसे सामूहिक प्रयासों से रोका जा सकता है। इसके लिए सरकारों, उद्योगों और आम जनता को मिलकर कदम उठाने होंगे। हमें कोयले और डीजल की जगह स्वच्छ सौर ऊर्जा को अपनाना होगा।
पब्लिक ट्रांसपोर्ट जैसे बस और मेट्रो का इस्तेमाल बढ़ाना बेहद जरूरी है। निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के लिए पानी का छिड़काव और मलबे का सही प्रबंधन होना चाहिए। साफ हवा पाना किसी भी नागरिक के लिए लग्जरी नहीं, बल्कि उसका बुनियादी अधिकार है।
Author: Pallavi Sharma


