Mumbai News: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को देश की अर्थव्यवस्था को लेकर एक बेहद मजबूत और सकारात्मक बयान दिया है। उन्होंने बताया कि चालू समय में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 682.3 अरब डॉलर के बेहद मजबूत और सुरक्षित स्तर पर पहुंच चुका है।
गवर्नर ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए साफ कहा कि यह विशाल फंड देश के लिए लगभग 11 महीनों के आयात खर्च को पूरा करने के लिए पूरी तरह पर्याप्त है। उन्होंने उम्मीद जताई कि विभिन्न केंद्रीय नीतियां आने वाले समय में भुगतान संतुलन को और ज्यादा मजबूत करेंगी।
बीमा क्षेत्र में शत-प्रतिशत एफडीआई समेत उठाए गए कई बड़े कदम
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने वाले कई अहम उपायों का जिक्र किया। इनमें प्रमुख वैश्विक व्यापार साझेदारों के साथ हुए हालिया समझौते, बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति और एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ाना शामिल है।
विदेशी वाणिज्यिक उधार नियमों में ढील से आर्थिक स्थिति होगी मजबूत
इसके अलावा सरकार ने ऊर्जा बदलाव को बढ़ावा देने, सीमावर्ती देशों के लिए एफडीआई नियमों में ढील देने और विदेशों से वाणिज्यिक उधार (ECB) ढांचे का उदारीकरण करने जैसे बड़े कदम उठाए हैं। ये सभी प्रयास देश के विदेशी मुद्रा भंडार को और ज्यादा बढ़ाने में बैकबोन साबित हो रहे हैं।
29 मई 2026 तक के आधिकारिक आंकड़ों में दिखी भारत की मजबूत स्थिति
गवर्नर ने मौद्रिक समीक्षा बैठक के दौरान कहा कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 29 मई 2026 तक 682.3 अरब डॉलर के स्तर पर था। यह विशाल भंडार करीब 11 महीने के आयात और देश के कुल विदेशी ऋण के 89.1 प्रतिशत हिस्से को चुकाने के मानकों के हिसाब से काफी मजबूत है।
विदेशी झटकों से अर्थव्यवस्था को पूरी तरह सुरक्षित रखता है सुरक्षा कवच
आरबीआई गवर्नर ने भरोसा देते हुए कहा कि हमारा विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी बाहरी वैश्विक झटके से देश को सुरक्षा प्रदान करता है। हमारे पास नियामकीय तथा बाजार-आधारित कई एडवांस साधन मौजूद हैं, जिनकी मदद से आवश्यकता पड़ने पर बाजार को व्यवस्थित रखने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं।
पश्चिम एशिया संकट के कारण सर्वकालिक उच्च स्तर से आई थी थोड़ी गिरावट
गौरतलब है कि चालू वर्ष में 27 फरवरी को समाप्त सप्ताह के दौरान भारत का यह विदेशी भंडार 728.49 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था। लेकिन पश्चिम एशिया में अचानक संघर्ष शुरू होने के बाद इसमें कुछ गिरावट देखी गई, क्योंकि रुपये को संभालने के लिए डॉलर बेचने पड़े थे।
गवर्नर मल्होत्रा ने अंत में कहा कि वैश्विक आर्थिक उथल-पुथल और ऊंचे शुल्कों के बीच भारत ने हमेशा चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया है। आने वाले समय में ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के कारण चालू खाते का घाटा बढ़ने का थोड़ा रिस्क जरूर है, लेकिन विदेशों से आने वाले धन प्रेषण से देश को बड़ी राहत मिलेगी।
Author: Rajesh Kumar


