Beirut News: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच लेबनान एक बार फिर भीषण सैन्य टकराव का केंद्र बन गया है। ईरान ने दोटूक चेतावनी दी है कि यदि इजरायल ने बेरूत पर हमला किया, तो वह खाड़ी देशों को निशाना बनाएगा। इससे पूरे क्षेत्र में महायुद्ध छिड़ने का खतरा पैदा हो गया है।
अमेरिका की कोशिशों से लेबनान में नए युद्धविराम की घोषणा तो हुई है, लेकिन इजरायल और हिजबुल्ला पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। इजरायल ने साफ कर दिया है कि वह लेबनान से अपनी सेना नहीं हटाएगा। वहीं, हिजबुल्ला का कहना है कि इजरायली सेना के रहने तक वह युद्धविराम नहीं मानेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बात कर बेरूत से सेना हटाने पर जोर दिया था। इसके बावजूद इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में हमले जारी रखे। सोहमोर क्षेत्र में हुए इजरायली हवाई हमले में संयुक्त राष्ट्र के एक सर्बियाई शांति सैनिक सहित पांच लोगों की मौत हो गई।
ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इजरायल पर युद्धविराम के उल्लंघन का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यदि बेरूत पर दोबारा हमला हुआ, तो ईरान चुप नहीं बैठेगा और करारा जवाब देगा। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि इस मुद्दे पर अमेरिका के साथ कूटनीतिक संदेशों के जरिए बातचीत जारी है।
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सहयोगियों को सचेत किया है। उन्होंने कहा कि यदि ईरान समर्थित हमलों में कोई भी अमेरिकी सैनिक मारा गया, तो युद्धविराम तुरंत खत्म कर दिया जाएगा। हालांकि, ट्रंप फिलहाल किसी बड़े क्षेत्रीय युद्ध से बचते हुए सीमित झड़पों को सहन करने के पक्ष में हैं।
इन शर्तों पर अटका है शांति समझौता
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, युद्धविराम समझौते के तहत कुछ ‘पायलट जोन’ बनाए जाएंगे। वहां लेबनानी सेना का नियंत्रण होगा और हिजबुल्ला जैसे सशस्त्र समूहों पर पाबंदी रहेगी। लेकिन इस समझौते में दक्षिणी लेबनान से इजरायली सेना की मुकम्मल वापसी का कोई स्पष्ट जिक्र नहीं किया गया है।
हिजबुल्ला प्रमुख नईम कासिम ने चेतावनी दी है कि जब तक इजरायली कब्जा रहेगा, उनका प्रतिरोध भी जारी रहेगा। इस बीच इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन ग्विर ने इस युद्धविराम को एक ‘गंभीर भूल’ बताया है। उन्होंने इस मुद्दे पर इजरायली कैबिनेट में मतदान कराने की मांग की है।
परमाणु संयंत्र के निरीक्षण की मिली मंजूरी
इन सब के बीच, ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने देशवासियों से दुश्मनों की साजिशों को नाकाम करने का आह्वान किया है। उन्होंने दावा किया कि जायोनी शासन अब अपने अंतिम दौर में पहुंच चुका है। इस तनावपूर्ण माहौल के बीच ईरान ने एक बड़ा कूटनीतिक कदम भी उठाया है।
ईरान ने संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था (IAEA) को बुशेहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र के निरीक्षण की अनुमति दे दी है। हालांकि, वह अब भी अपने संवर्धित यूरेनियम भंडार की पूरी जानकारी देने से बच रहा है। वैश्विक बाजारों में युद्धविराम की उम्मीद से कच्चे तेल की कीमतें तीन फीसदी गिरकर 94 डॉलर प्रति बैरल पर आ गईं।
Author: Pallavi Sharma


