International News: भारत और ओमान के बीच हुआ ऐतिहासिक व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) आज सोमवार यानी 1 जून 2026 से आधिकारिक रूप से लागू हो गया है। यह समझौता पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मस्कट यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच साइन हुआ था।
इस बड़े ट्रेड समझौते के जमीन पर लागू होने के साथ ही भारतीय श्रम-प्रधान उत्पादों को ओमान के बाजारों में अब सीधे जीरो-ड्यूटी प्रवेश मिलेगा। सरकार के इस कदम से खाड़ी देशों में भारत के घरेलू निर्यात को एक नई और तेज रफ्तार मिलने की पूरी उम्मीद है।
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए इस समझौते के लागू होने की बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत के किसानों, कारीगरों, महिलाओं, छात्रों और MSMEs की तरक्की के रास्ते खोलने में मददगार बनेगा।
पीयूष गोयल ने बताया कि यह डील नए वैश्विक बाजार उपलब्ध कराने, निर्यात बढ़ाने और निवेश आकर्षित करने में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी। इससे देश में रोजगार के नए मौके बढ़ेंगे। यह नया मिशन भारत के छोटे उद्यमियों को सीधे वैश्विक मंच प्रदान करेगा।
वैश्विक समुद्री संकट के बीच बेहद रणनीतिक है यह नया समझौता
भारत और ओमान के बीच यह समझौता ऐसे नाजुक समय पर लागू हुआ है, जब अमेरिका और ईरान के बीच गहराए संघर्ष ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वाले प्रमुख समुद्री व्यापारिक रास्ते को बड़े पैमाने पर प्रभावित किया है। इस वजह से वैश्विक शिपिंग रूट पर काफी दबाव बढ़ गया है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया में हर रोज होने वाले कुल तेल उपभोग का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा संभालता है। इसके अलावा समुद्री रास्ते से होने वाले वैश्विक तेल व्यापार का 25 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। इसे दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग माना जाता है।
ईरान की तरफ से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बढ़ते सैन्य दबाव के कारण भारत को सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से कच्चे तेल की आपूर्ति रुकने का डर रहता है। इस बड़े संकट के बीच ओमान की अनूठी भौगोलिक स्थिति भारत के लिए बेहद मददगार बनेगी।
ज्यादातर खाड़ी देशों के विपरीत ओमान का एक बहुत बड़ा समुद्री किनारा होर्मुज स्ट्रेट के पूरी तरह बाहर अरब सागर और ओमान की खाड़ी में स्थित है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय संघर्ष के दौर में भी ओमान का समुद्री मार्ग भारत के व्यापार के लिए पूरी तरह सुरक्षित रहेगा।
प्रसिद्ध थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने इस विषय पर अपनी महत्वपूर्ण राय दी। उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी बड़ी सैन्य परेशानी के बावजूद ओमान के सलालाह और दुक्म बंदरगाह आराम से संचालित होते रहेंगे।
अजय श्रीवास्तव के अनुसार खाड़ी देशों में जारी भारी अस्थिरता के दौर में भी ओमान भारत के लिए एक भरोसेमंद व्यापारिक गेटवे बनेगा। इस रणनीतिक समझौते से भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। देश को बिना किसी रुकावट के कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति मिलती रहेगी।
Author: Rajesh Kumar


