Delhi News: म्यूचुअल फंड में एसआईपी (Systematic Investment Plan) को लंबे समय में बड़ी संपत्ति बनाने का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है। अक्सर नए निवेशकों को यही सलाह दी जाती है कि वे हर महीने एक निश्चित राशि बाजार में निवेश करें और अनुशासित बने रहें।
लेकिन फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स मानते हैं कि केवल एक तय राशि का निवेश करना ही काफी नहीं है। अगर निवेशक समय-समय पर अपनी एसआईपी राशि में थोड़ी बढ़ोतरी करते रहें, तो मैच्योरिटी फंड में जमीन-आसमान का अंतर देखने को मिल सकता है, जो आपकी किस्मत बदल देगा।
क्या होती है स्टेप-अप एसआईपी और यह कैसे काम करती है?
मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार स्टेप-अप एसआईपी (Step-Up SIP) को टॉप-अप एसआईपी भी कहा जाता है। यह एक ऐसी एडवांस व्यवस्था है, जिसमें निवेशक हर साल अपनी मासिक एसआईपी राशि को एक निश्चित प्रतिशत या तय रकम के साथ स्वचालित रूप से बढ़ा देता है।
आय बढ़ने के साथ हर साल मात्र 10 प्रतिशत बढ़ाएं अपना निवेश
मान लें कि कोई व्यक्ति 5,000 रुपये की मासिक एसआईपी से अपने निवेश की शुरुआत करता है और हर साल इसमें मात्र 10% की बढ़ोतरी करने का विकल्प चुनता है। ऐसा करने से समय के साथ उसका कुल निवेश और मिलने वाला रिटर्न दोनों बहुत तेजी से बढ़ते हैं।
कंपाउंडिंग का गणित: सामान्य एसआईपी बनाम स्टेप-अप एसआईपी
अगर कोई निवेशक 5,000 रुपये की मासिक एसआईपी को बिना बढ़ाए लगातार 21 वर्षों तक जारी रखता है, तो 12 प्रतिशत के अनुमानित सालाना रिटर्न के साथ उसे मैच्योरिटी पर कुल 52,15,034 रुपये मिलेंगे। इसमें निवेशक की जेब से कुल 12,60,000 रुपये जमा होंगे।
10% की मामूली बढ़ोतरी से अंतिम फंड सीधा हो जाएगा दोगुना
इसके विपरीत, यदि वही निवेशक हर साल अपनी एसआईपी में 10% का स्टेप-अप करता है, तो 21 साल में उसका कुल निवेश 38,40,150 रुपये होगा। लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि 12% रिटर्न के हिसाब से उसका अंतिम कॉर्पस बढ़कर सीधा 1,08,63,008 रुपये पहुंच जाएगा।
महंगाई डायन और बदलती लाइफस्टाइल को मात देना बेहद जरूरी
अक्सर निवेशक कंपाउंडिंग की ताकत को तो समझते हैं, लेकिन महंगाई के खतरनाक प्रभाव को पूरी तरह नजरअंदाज कर देते हैं। हर साल नौकरी में आपकी आय बढ़ती है, लेकिन यदि एसआईपी राशि स्थिर रहती है, तो वास्तव में आप अपनी कमाई का बहुत छोटा हिस्सा निवेश कर रहे होते हैं।
यह स्टेप-अप एसआईपी आपके निवेश को बढ़ती आय और महंगाई के बिल्कुल अनुरूप बनाए रखने में सबसे ज्यादा मदद करती है। इसलिए वित्तीय लक्ष्यों को आसानी से और समय से पहले हासिल करने के लिए हमेशा सामान्य एसआईपी के बजाय स्टेप-अप एसआईपी का ही स्मार्ट विकल्प चुनना चाहिए।
Author: Rajesh Kumar


