World News: प्रशांत महासागर में स्थित बेहद छोटे द्वीपीय देश पलाऊ ने चीन के भारी दबाव के बाद भी ताइवान का साथ निभाने का ऐतिहासिक फैसला किया है। चीनी सरकार की ओर से मिल रही लगातार आर्थिक और साइबर चुनौतियों को दरकिनार करते हुए पलाऊ ने अपनी स्वतंत्र विदेश नीति को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है।
चीन के भारी आर्थिक और साइबर दबाव में पलाऊ
करीब 18 हजार की आबादी वाले इस देश पर चीन ने ताइवान से राजनयिक संबंध तोड़ने का चौतरफा दबाव बनाया था। पलाऊ के राष्ट्रपति सुरांगेल व्हिप्स जूनियर ने खुद खुलासा किया कि चीनी अधिकारी उन पर ताइवान के खिलाफ दूरी बनाने का लगातार दबाव बना रहे थे। हालांकि, उन्होंने इस मांग को सीधे तौर पर ठुकरा दिया।
पलाऊ की अर्थव्यवस्था पूरी तरह पर्यटन पर टिकी है और चीन ने इसे ही अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया। वर्ष 2017 में पलाऊ ने जब ताइवान को मान्यता देने से इनकार नहीं किया, तब बीजिंग ने अपने नागरिकों के पलाऊ जाने वाले ग्रुप टूरिज्म पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था।
पर्यटन पर लगा बैन और गोपनीय दस्तावेज लीक
चीन ने बाद में सुरक्षा कारणों का हवाला देकर कई यात्रा चेतावनियां भी जारी कीं, जिससे पलाऊ को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। बीजिंग ने लालच दिया कि ताइवान से रिश्ता तोड़ने पर वह लाखों पर्यटक भेजेगा। इसके बावजूद पलाऊ सरकार ने चीन के इस बड़े प्रलोभन को पूरी तरह खारिज कर दिया।
आर्थिक घेराबंदी के अलावा पलाऊ को साल 2024 में बड़े साइबर हमले का भी सामना करना पड़ा। हैकरों ने सरकार के 20 हजार से अधिक गोपनीय दस्तावेज लीक कर दिए थे। इन फाइलों में ताइवान के साथ राजनयिक संपर्कों और अमेरिका-जापान की सैन्य गतिविधियों की अत्यंत संवेदनशील जानकारियां शामिल थीं।
ताइवान के राष्ट्रपति कार्यालय का बड़ा आधिकारिक ऐलान
पलाऊ के राष्ट्रपति ने इन साइबर हमलों के पीछे चीन का हाथ होने की प्रबल आशंका जताई है। इस तनाव के बीच ताइवान के राष्ट्रपति कार्यालय ने घोषणा की है कि उपराष्ट्रपति शियाओ बी-खिम शनिवार से बुधवार तक पलाऊ की बेहद महत्वपूर्ण आधिकारिक यात्रा पर रहेंगी। यह यात्रा राष्ट्रपति सुरांगेल के विशेष निमंत्रण पर हो रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद पलाऊ का यह साहसी कदम अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक मिसाल बन गया है। पलाऊ ने साबित कर दिया है कि दुनिया के छोटे देश भी किसी महाशक्ति के आगे घुटने टेकने के बजाय अपनी संप्रभुता और विदेश नीति की रक्षा मजबूती से कर सकते हैं।
Author: Pallavi Sharma


