Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य की विभिन्न अदालतों में सरकार का पक्ष रखने वाले शासकीय अधिवक्ताओं के हक में एक बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश कैबिनेट ने इन वकीलों की रिटेनरशिप और बहस फीस में ऐतिहासिक बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है।
इस फैसले का राज्य के वकील समुदाय ने दिल खोलकर स्वागत किया है। सभी सरकारी अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति गहरा आभार जताया है। राज्य के महाधिवक्ता अजय मिश्र और उनकी पूरी विधिक टीम ने सरकार के इस कदम को बेहद ऐतिहासिक बताया है।
अधिवक्ताओं ने अपने संयुक्त बयान में कहा कि मुख्यमंत्री ने अदालतों में राज्य सरकार के हितों की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने की आवश्यकता को समझा। उन्होंने खुद इस विषय पर पहल की थी। अब कैबिनेट के इस निर्णय से वकीलों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी हुई है।
न्यायिक व्यवस्था को अधिक सक्षम बनाने की कोशिश
वरिष्ठ वकीलों का कहना है कि यह निर्णय केवल फीस बढ़ाने का सामान्य मामला नहीं है। यह कदम पूरी न्यायिक व्यवस्था को अधिक सक्षम, उत्तरदायी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। इससे सरकारी मामलों की गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध पैरवी को और अधिक बल मिलेगा।
महाधिवक्ता अजय मिश्र ने बताया कि विभिन्न श्रेणियों के पैनल वकीलों को इस निर्णय का सीधा और व्यापक लाभ पहुंचेगा। बदलते न्यायिक परिदृश्य, मुकदमों की लगातार बढ़ती संख्या और बेहद जटिल कानूनी विषयों को देखते हुए पारिश्रमिक ढांचे में इस तरह के बड़े सुधार की सख्त जरूरत थी।
लगभग चौदह वर्षों के लंबे इंतजार के बाद हुआ सुधार
विधिक विशेषज्ञों के मुताबिक जिला अदालतों के वकीलों की फीस में लगभग १० वर्ष बाद बदलाव हुआ है। वहीं महाधिवक्ता स्तर पर लगभग १४ वर्ष के लंबे इंतजार के बाद यह पारिश्रमिक संशोधन किया गया है। यह निर्णय वर्तमान प्रदेश सरकार की संवेदनशीलता और दूरदर्शिता को साफ दर्शाता है।
सरकार के इस कदम से अब शासकीय अधिवक्ता अधिक उत्साह और ऊर्जा के साथ न्यायालयों में जनता तथा राज्य का पक्ष मजबूती से रखेंगे। बढ़े हुए मानदेय से युवा वकीलों को भी सरकारी पैनल से जुड़ने की प्रेरणा मिलेगी। इससे न्याय प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद बढ़ गई है।
Author: Ajay Mishra


