Gangtok News: आज 05 जून को पूरी दुनिया में विश्व पर्यावरण दिवस 2026 मनाया जा रहा है। इस मौके पर हमारे सामने सबसे बड़ा संकट खतरनाक प्लास्टिक कचरे का है। लेकिन भारत में एक राज्य ऐसा भी है, जिसने दशकों पहले ही इस प्लास्टिक के बड़े खतरे को भांप लिया था और सख्त कदम उठाया था।
हम बात कर रहे हैं खूबसूरत पहाड़ी राज्य सिक्किम की। जब देश में प्लास्टिक थैलियों का चलन चरम पर था, तब साल 1998 में सिक्किम ने इतिहास रच दिया। यह डिस्पोजेबल प्लास्टिक थैलियों पर पूरी तरह पाबंदी लगाने वाला भारत का सबसे पहला राज्य बना और एक बड़ी मिसाल पेश की।
साल 2016 में सिंगल-यूज प्लास्टिक पर हुई ‘डबल स्ट्राइक’
सिक्किम का यह अनोखा पर्यावरण अभियान सिर्फ थैलियों पर ही नहीं रुका। प्रदूषण से निपटने के लिए साल 2016 में राज्य सरकार ने दो और बेहद सख्त नियम लागू किए। इसके तहत सभी सरकारी दफ्तरों और कार्यक्रमों में बोतलबंद पानी के इस्तेमाल को हमेशा के लिए पूरी तरह बैन कर दिया गया।
थर्मोकोल के बर्तनों की छुट्टी और बांस के विकल्पों की एंट्री
इसी फैसले के तहत पूरे सिक्किम में थर्मोकोल या स्टायरोफोम से बनी डिस्पोजेबल प्लेट और कप-चम्मच को गैर-कानूनी घोषित किया गया। प्रशासन ने पाबंदी के साथ लोगों को बांस, पत्तों और गन्ने की खोई से बने इको-फ्रेंडली उत्पाद दिए। दुकानदारों ने भी इन प्राकृतिक विकल्पों को खुशी-खुशी अपना लिया।
सख्ती और जागरूकता के अनूठे तालमेल से बदला पूरा राज्य
किसी भी पुरानी आदत को बदलना बहुत मुश्किल होता है। इसे मुमकिन बनाने के लिए सरकार ने व्यापक जागरूकता अभियान चलाए। साथ ही नियम तोड़ने वालों पर भारी जुर्माना भी लगाया। इसी का नतीजा है कि आज सिक्किम का बच्चा-बच्चा पर्यावरण संरक्षण के प्रति पूरी तरह जागरूक हो चुका है।
केमिकल खादों को छोड़ सिक्किम बना पहला पूर्ण जैविक राज्य
सिक्किम का प्रकृति-प्रेम सिर्फ कचरा प्रबंधन तक सीमित नहीं रहा। साल 2016 में इस राज्य ने खेती में भी एक नया इतिहास रचा। रासायनिक खादों से पूरी तरह दूरी बनाकर सिक्किम भारत का पहला शत-प्रतिशत जैविक (Organic) राज्य बना, जहां पूरी तरह जहरमुक्त और शुद्ध खेती की जाती है।
आज विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के मौके पर सिक्किम की यह बड़ी सफलता देश के अन्य राज्यों के लिए एक बेहतरीन रोल मॉडल बन चुकी है। सिक्किम से सीख लेकर अब कई शहरों ने सिंगल-यूज प्लास्टिक पर नकेल कसी है। प्रकृति को बचाने के लिए उठाए गए मजबूत कदम ही सुंदर भविष्य की नींव रखते हैं।
Author: Bhutia Lepcha

