Nagpur News: मशहूर उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की जमकर तारीफ की है। नागपुर में आयोजित संघ के प्रशिक्षण शिविर में बिड़ला मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने सौ साल पुराने इस संगठन को समाज के लिए हमेशा खड़ा रहने वाला बताया। इस कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत भी मौजूद थे।
बिड़ला ने संघ के विशाल नेटवर्क पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि आज संघ की लगभग तिरासी हजार शाखाएं और साठ लाख स्वयंसेवक हैं। यह सभी एक ही दिशा में काम कर रहे हैं। भूकंप और सुनामी जैसी भयंकर प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी आरएसएस ने हमेशा देशवासियों की सेवा की है। यह संगठन देश के लिए अभूतपूर्व है।
विकसित भारत और उद्योगपतियों की भूमिका
दादा जीडी बिड़ला को याद कर कुमार मंगलम ने कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि विभाजन के वक्त कपास के खेत पाकिस्तान चले गए। उनके दादा ने उस चुनौती को बड़े अवसर में बदला। आज भारत दुनिया की छठी बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। देश अब नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है।
बिड़ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमृतकाल वाले दृष्टिकोण का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना बहुत बड़ा है। इसे पूरा करने में बड़े उद्योगों की भूमिका बहुत खास होने वाली है। आत्मनिर्भरता केवल एक आर्थिक नीति बिल्कुल नहीं है। बल्कि यह सच्चे मायने में राष्ट्र निर्माण का एक बड़ा और महत्वपूर्ण हिस्सा है।
संघ और आदित्य बिड़ला ग्रुप में समानताएं
आदित्य बिड़ला ग्रुप और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कार्यप्रणाली में कई समानताएं हैं। बिड़ला ने बताया कि दोनों ही संस्थाएं प्राथमिक शिक्षा और महिला सशक्तिकरण को महत्व देती हैं। सामाजिक उत्थान और कौशल विकास पर भी दोनों का जोर है। दोनों संगठनों का मुख्य उद्देश्य समाज का विकास करना है।
युवाओं को खास संदेश देते हुए कुमार मंगलम बिड़ला ने एक नई अपील की। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं को भारत में रहकर ही काम करना चाहिए। देश के लिए चीजें बनाएं और पूरी दुनिया के लिए नए उत्पादों का सृजन करें। युवा भारत को आत्मनिर्भर बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें।
बिड़ला ने संघ प्रमुख मोहन भागवत संग अपनी मुलाकातों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भागवत जी से बात कर भविष्य पर भरोसा मजबूत होता है। संघ की दशकों की मेहनत साफ नजर आती है। बाहरी व्यक्ति भी इस संगठन के निस्वार्थ सेवा भाव को देखकर बहुत प्रभावित होता है।
Author: Sachin Kulkarni


