Delhi News: देश के दस महत्वपूर्ण राज्यों की चौबीस राज्यसभा सीटों के लिए आगामी अठारह जून को मतदान संपन्न होगा। चुनाव आयोग वोटिंग के तुरंत बाद उसी दिन देर शाम तक नतीजे घोषित कर देगा। यह महामुकाबला केंद्र की सत्ताधारी एनडीए सरकार के लिए राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।
दो-तिहाई बहुमत की दहलीज से कितनी दूर है एनडीए
संसदीय आंकड़ों के मुताबिक एनडीए अभी राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के जादुई आंकड़े से पंद्रह सांसद दूर है। इस बड़ी वजह से पूरे देश की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि भारतीय जनता पार्टी और उसके तमाम सहयोगी दल इस चुनावी रण में कितनी सीटें अपने पाले में ला पाते हैं।
वर्तमान में दो सौ पैंतालीस सदस्यीय राज्यसभा के भीतर एनडीए के पास कुल एक सौ अड़तालीस सांसद मौजूद हैं। इनमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी अकेले भारतीय जनता पार्टी की है। बीजेपी के कुल एक सौ तेरह माननीय सदस्य इस समय देश के उच्च सदन में अपना प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
संविधान संशोधन विधेयक पास कराने के लिए नंबर गेम जरूरी
संसद में किसी भी बड़े संविधान संशोधन विधेयक को पास कराने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत पड़ती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस चुनाव के बाद भी एनडीए के लिए इस जादुई नंबर तक पहुंचना आसान नहीं होगा, लेकिन कई राज्यों में उसकी स्थिति सुधरेगी।
इस बार आंध्र प्रदेश और गुजरात की चार-चार सीटों पर चुनाव होंगे। मध्य प्रदेश और राजस्थान में तीन-तीन सीटों पर वोट डाले जाएंगे। इसके साथ ही मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम में एक-एक, झारखंड में दो और कर्नाटक में चार सीटों पर मतदान होगा। दो उपचुनाव भी साथ होंगे।
दक्षिण के राज्यों में मुकाबला हुआ बेहद दिलचस्प
कर्नाटक की चार सीटों पर मुकाबला बहुत ही रोचक मोड़ पर पहुंच गया है। समीकरणों के अनुसार एनडीए को एक सीट मिलना बिल्कुल तय है। वहीं कांग्रेस पार्टी दो सीटों पर आसानी से जीत दर्ज कर सकती है। चौथी सीट का फैसला विधायकों के अंतरात्मा की आवाज पर टिक गया है।
आंध्र प्रदेश की एक सौ पचहत्तर सदस्यीय विधानसभा में टीडीपी के पास एक सौ पैंतीस विधायक हैं। जनसेना के पास इक्कीस और बीजेपी के पास आठ विधायक हैं। दूसरी तरफ वाईएसआर कांग्रेस के पास सिर्फ ग्यारह सीटें हैं। एनडीए यहां की सभी चारों सीटों पर क्लीन स्वीप कर सकता है।
गुजरात और राजस्थान में बीजेपी को बड़ी उम्मीदें
गुजरात विधानसभा में बीजेपी के पास एक सौ इकसठ विधायकों का प्रचंड बहुमत है। इस बड़े नंबर गेम के आधार पर भाजपा को चारों सीटों पर एकतरफा जीत की उम्मीद है। दूसरी तरफ राजस्थान में दो सीटें बीजेपी और एक सीट मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के खाते में जा सकती है।
मध्य प्रदेश में भी भाजपा को मजबूत संख्या बल के कारण दो सीटों पर सीधी बढ़त हासिल है। यहां भी कांग्रेस को एक सीट से संतोष करना पड़ेगा। झारखंड की बात करें तो वहां इंडिया गठबंधन के पास छप्पन विधायक हैं, जबकि विपक्ष में बैठी एनडीए के पास चौबीस विधायक हैं।
झारखंड में संख्या बल के हिसाब से दोनों सीटें सत्तारूढ़ गठबंधन के पास जाती दिख रही हैं। हालांकि राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि रणनीतिक क्रॉस वोटिंग के जरिए एनडीए एक सीट पर मुकाबला फंसा सकती है। अठारह जून का यह चुनाव संसद में शक्ति संतुलन का बड़ा पैमाना बनेगा।
Author: Harikarishan Sharma


