Vi और Meta ने मिलाया हाथ: अब WhatsApp और Facebook लॉगिन के लिए नहीं चाहिए OTP, नई तकनीक से खुला सुरक्षा का नया रास्ता

Technology News: भारत में डिजिटल क्रांति के तेजी से आगे बढ़ने के साथ ही अब यूजर प्राइवेसी और डिजिटल सुरक्षा को लेकर बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में प्रमुख टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन आइडिया (Vi) ने टेक दिग्गज मेटा (Meta) के साथ एक बेहद महत्वपूर्ण और रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की है।

इस साझेदारी के तहत देश में ‘साइलेंट मोबाइल वेरिफिकेशन’ (SMV) नाम की एक नई और एडवांस्ड नेटवर्क-बेस्ड वेरिफिकेशन तकनीक को आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया गया है। इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य व्हाट्सएप (WhatsApp), फेसबुक (Facebook) और इंस्टाग्राम (Instagram) पर लॉगिन को सुरक्षित बनाना है।

अब पासवर्ड और OTP के झंझट से मिलेगी पूरी मुक्ति

इस नई एसएमवी (SMV) तकनीक के आने से अब पारंपरिक पासवर्ड और ओटीपी (OTP) आधारित वेरिफिकेशन की अनिवार्यता को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है। वोडाफोन आइडिया ने जानकारी दी है कि इस सुविधा के तहत यूज़र्स को लॉगिन करते समय केवल अपना चालू मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा।

नंबर दर्ज करने के बाद पूरा वेरिफिकेशन सीधे टेलीकॉम नेटवर्क के माध्यम से बैकग्राउंड में ही पूरा कर लिया जाएगा। इस अनूठी प्रक्रिया में मेटा के ऐप्स वी (Vi) के सुरक्षित टेलीकॉम नेटवर्क को एक इनक्रिप्टेड वेरिफिकेशन सिग्नल भेजेंगे, जिससे बिना किसी पासवर्ड के यूज़र का अकाउंट सीधे लॉगिन हो जाएगा।

WhatsApp और Instagram यूज़र्स को मिलेगा बड़ा फायदा

यह आधुनिक नेटवर्क-बेस्ड ऑथेंटिकेशन तकनीक खासतौर पर व्हाट्सएप, फेसबुक और इंस्टाग्राम के करोड़ों यूज़र्स के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए डिजाइन की गई है। कंपनी का दावा है कि इससे नए यूज़र्स का रजिस्ट्रेशन, लॉगिन, री-लॉगिन और अकाउंट रिकवरी जैसे जटिल काम पहले से कई गुना तेज हो जाएंगे।

चूंकि यह पूरा वेरिफिकेशन सिस्टम बैकग्राउंड में काम करता है, इसलिए यूज़र्स को अलग-अलग ऐप्स के बीच स्विच करने या फिर मोबाइल पर ओटीपी आने का लंबा इंतजार करने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे समय की बड़ी बचत होगी और ऐप का यूज़र एक्सपीरियंस भी काफी शानदार हो जाएगा।

फिशिंग और डिजिटल फ्रॉड पर लगेगी मजबूत लगाम

वोडाफोन आइडिया ने इस तकनीक को लेकर यह बड़ा दावा भी किया है कि SMV सिस्टम फिशिंग अटैक और डिजिटल आइडेंटिटी चोरी जैसे खतरनाक साइबर खतरों के खिलाफ अभेद्य सुरक्षा देगा। यूज़र को कोई भी संवेदनशील जानकारी मैनुअली दर्ज नहीं करनी होगी, जिससे साइबर ठगी का खतरा लगभग खत्म हो जाएगा।

टेक विशेषज्ञों का भी मानना है कि यह नेटवर्क-आधारित ऑथेंटिकेशन आने वाले समय में भारतीय डिजिटल सुरक्षा का एक नया और मजबूत मानक बन सकता है। इसके साथ ही Vi ने यह संकेत भी दिया है कि भविष्य में इस एडवांस सुरक्षा तकनीक को अन्य बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और इकोसिस्टम पार्टनर्स के लिए भी रोल आउट किया जाएगा।

Author: Mohit

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