Android यूज़र्स सावधान! गूगल का नया AI फ़ीचर कॉल उठाने से पहले ही बता देगा ‘फ़ेक है या असली’

Technology News: स्मार्टफोन की दुनिया में कदम रखते ही यूज़र्स के लिए सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल बन जाती है। इसी बीच टेक दिग्गज गूगल (Google) ने एंड्रॉयड (Android) स्मार्टफोन यूज़र्स के लिए एक बेहद क्रांतिकारी सिक्योरिटी फ़ीचर वैश्विक स्तर पर रोल आउट करना शुरू कर दिया है।

यह नया फ़ीचर संदिग्ध और फ़ेक कॉल्स का तुरंत पता लगाता है। सबसे खास बात यह है कि आपके कॉल का जवाब देने यानी फ़ोन उठाने से पहले ही यह स्क्रीन पर चेतावनी जारी कर देता है। गूगल का दावा है कि इससे दुनिया भर के करोड़ों यूज़र्स सुरक्षित हो सकेंगे।

AI वॉइस क्लोनिंग और स्पूफ़िंग पर लगेगी लगाम

गूगल के अनुसार, यह नया एडवांस्ड फ़ीचर वर्तमान में तेजी से बढ़ रहे एआई (AI) वॉइस क्लोनिंग स्कैम्स और कॉल स्पूफ़िंग हमलों से जुड़ी गंभीर समस्याओं को जड़ से खत्म करने में मदद करेगा। यह नया सिक्योरिटी फ़ीचर सुरक्षा की एक अभेद्य और अतिरिक्त परत के तौर पर काम करेगा।

गूगल का यह अभूतपूर्व फ़ेक कॉल डिटेक्शन फ़ीचर दुनिया भर के Android यूज़र्स के लिए जारी किया जा रहा है। यह मुख्य रूप से गूगल के आधिकारिक “Phone by Google” ऐप में ही इन-बिल्ट मिलेगा। इसके लिए यूज़र्स को कोई भी बाहरी थर्ड-पार्टी ऐप डाउनलोड करने की ज़रूरत नहीं होगी।

इन सभी Android फ़ोन्स पर करेगा काम

गूगल ने एक आधिकारिक ब्लॉग पोस्ट साझा कर इस बड़े अपडेट की पूरी घोषणा की है। कंपनी ने बताया कि जो भी स्मार्टफोन Android 12 या उसके बाद के किसी भी नए वर्ज़न पर काम कर रहे हैं, उन सभी डिवाइस में यह सुरक्षा तकनीक पूरी तरह से सपोर्ट करेगी।

कंपनी ने साफ़ किया कि यह फ़ेक कॉल डिटेक्शन फ़ीचर “Phone by Google” ऐप में डिफ़ॉल्ट रूप से पहले से ही चालू (By Default On) रहता है। इससे यह किसी भी अनचाहे या धोखाधड़ी वाले कॉल्स का रियल-टाइम में खुद-ब-खुद बहुत सटीकता से पता लगा लेता है।

यह आधुनिक सिक्योरिटी फ़ीचर एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन को बनाए रखने के लिए रिच कम्युनिकेशन सर्विसेज (RCS) तकनीक का भी इस्तेमाल करता है। इस एडवांस कोडिंग के इस्तेमाल से स्मार्टफोन यूज़र की निजी प्राइवेसी और डेटा सिक्योरिटी पहले के मुकाबले कई गुना ज्यादा बढ़ जाती है।

पिनिंग तकनीक से खुलेगी कॉलर की पोल

जब भी कोई Android फ़ोन किसी संभावित फ़ेक कॉल को डिटेक्ट करेगा, तो कॉल की वैधता की पुष्टि करने के लिए प्राप्तकर्ता का हैंडसेट सामने वाले कॉलर के फ़ोन को तुरंत पिंग करेगा। इस पिंगिंग तकनीक से बैकग्राउंड में ही कॉलर के नेटवर्क और डिवाइस की असलियत का पता चल जाएगा।

अगर दूसरी तरफ़ का वास्तविक यूज़र पिंग मिलने पर पुष्टि करता है कि “मैं अभी कॉल नहीं कर रहा हूँ,” तो ऐप प्राप्तकर्ता को तुरंत अलर्ट भेज देगा। स्क्रीन पर लाल रंग की चेतावनी फ्लैश होगी और ऐप यूज़र को तुरंत कॉल काट देने की सख्त सलाह देगा।

इस तकनीक से यूज़र्स फ़ेक कॉल्स और स्पूफ़िंग हमलों का शिकार होने से पूरी तरह बच जाएँगे। इंटरपोल (Interpol) की मार्च 2026 की ‘ग्लोबल फाइनेंशियल फ्रॉड थ्रेट असेसमेंट’ रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में धोखाधड़ी के कारण $400 बिलियन (करीब ₹38,28,300 करोड़) से ज्यादा का भारी वित्तीय नुकसान हो रहा है।

Author: Mohit

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