Jharkhand News: महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ड्यूटी से गायब रहने वाले डॉक्टरों के खिलाफ अस्पताल प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। अस्पताल अधीक्षक डॉ. बलराम झा ने मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने और परिसर में कड़ा अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए एक नया और बड़ा आदेश जारी कर दिया है।
अस्पताल प्रशासन के इस नए आदेश के तहत अब ड्यूटी के दौरान किसी भी डॉक्टर के अनुपस्थित पाए जाने पर न केवल उस डॉक्टर पर कार्रवाई होगी, बल्कि संबंधित विभाग के प्रमुख (एचओडी) की जवाबदेही भी तय की जाएगी। प्रशासन के इस कड़े कदम से लापरवाह डॉक्टरों में हड़कंप मच गया है।
लापरवाह डॉक्टरों के कारण मरीजों को होती है भारी परेशानी
अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक एमजीएम अस्पताल के जूनियर रेजिडेंट, सीनियर रेजिडेंट और सहायक प्राध्यापकों की नियमित ड्यूटी ओपीडी, इमरजेंसी और आईसीयू में लगाई जाती है। इन संवेदनशील विभागों में मरीजों की भारी भीड़ उमड़ती है, इसलिए यहां चौबीसों घंटे डॉक्टरों की सक्रिय मौजूदगी बेहद जरूरी मानी जाती है।
इसके बावजूद अक्सर शिकायतें मिल रही थीं कि ड्यूटी रोस्टर में नाम होने के बाद भी कई डॉक्टर अपने तय कार्यस्थल से गायब रहते हैं। डॉक्टरों की इस घोर लापरवाही के कारण दूर-दराज से आने वाले मरीजों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है और स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप हो जाती हैं।
अधीक्षक ने विभागाध्यक्षों को दिए सख्त निगरानी के निर्देश
अस्पताल अधीक्षक द्वारा जारी आधिकारिक गाइडलाइन में स्पष्ट किया गया है कि अब किसी भी डॉक्टर के गायब होने पर संबंधित विभागाध्यक्ष को इसकी लिखित जानकारी तुरंत अधीक्षक कार्यालय को भेजनी होगी। अगर कोई डॉक्टर बिना किसी पूर्व सूचना या छुट्टी के गायब मिलता है, तो उसकी रिपोर्ट तत्काल अस्पताल प्रबंधन को दी जाएगी।
अधीक्षक ने सभी विभागाध्यक्षों को अपने-अपने विभागों के डॉक्टरों की उपस्थिति पर कड़ी नजर रखने और उनका रोजाना का रिकॉर्ड मेंटेन करने का निर्देश दिया है। अस्पताल प्रशासन का मानना है कि इमरजेंसी और आईसीयू जैसे महत्वपूर्ण वार्डों में डॉक्टरों की अनुपस्थिति सीधे तौर पर मरीजों की जान से खिलवाड़ है।
नियमों की अनदेखी करने पर होगी कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई
इस नई व्यवस्था के लागू होने से विभागाध्यक्षों की जिम्मेदारी अब पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। उन्हें हर हाल में यह सुनिश्चित करना होगा कि रोस्टर के मुताबिक सभी डॉक्टर अपने केबिन और वार्ड में उपस्थित रहें। किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर एचओडी से सीधे जवाब-तलब किया जाएगा।
अस्पताल प्रबंधन ने साफ संकेत दिए हैं कि लगातार गायब रहने वाले डॉक्टरों के खिलाफ जल्द ही निलंबन जैसी कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है। प्रबंधन का मुख्य उद्देश्य किसी पर अनावश्यक दबाव बनाना नहीं, बल्कि अस्पताल की कार्य संस्कृति में सुधार लाना और मरीजों को समय पर इलाज देना है।
अस्पताल की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए बड़ा कदम
एमजीएम अस्पताल में प्रतिदिन हजारों गरीब मरीज अपने इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे संकट के समय में डॉक्टरों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक हो जाता है। स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के बीच प्रशासन का यह फैसला एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।
आने वाले दिनों में इस नई व्यवस्था का सकारात्मक असर अस्पताल की पूरी कार्यप्रणाली, डॉक्टरों के अनुशासन और मरीजों को मिलने वाली चिकित्सा सुविधाओं पर साफ दिखेगा। अस्पताल प्रबंधन को पूरी उम्मीद है कि इस कड़े नियम से डॉक्टरों की उपस्थिति सुधरेगी और मरीजों को भटकना नहीं पड़ेगा।
Author: Rohit Mahato


