Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में नए मुख्य सचिव को लेकर सरगर्मी बढ़ गई है। मौजूदा मुख्य सचिव संजय गुप्ता 31 मई को सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। राज्य की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार जल्द ही इस शीर्ष प्रशासनिक पद के लिए नए नाम पर अंतिम मुहर लगा सकती है।
मुख्य सचिव पद की दौड़ में ये बड़े चेहरे शामिल
वरिष्ठता के आधार पर 1993 बैच के आईएएस अधिकारी केके पंत का नाम इस दौड़ में सबसे आगे चल रहा है। वह इस समय अतिरिक्त मुख्य सचिव के रूप में वन और गृह विभाग संभाल रहे हैं। उत्तराखंड के मूल निवासी पंत के पास दिसंबर 2030 तक का लंबा कार्यकाल बचा हुआ है।
इस अहम रेस में 1994 बैच की आईएएस अधिकारी अनुराधा ठाकुर का नाम भी तेजी से गूंज रहा है। वह वर्तमान में केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के विभाग में सचिव हैं। हालांकि प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि अनुराधा ठाकुर फिलहाल केंद्र में ही अपनी सेवाएं जारी रख सकती हैं।
इसी बैच के आईएएस अधिकारी ओंकार शर्मा भी मुख्य सचिव पद के मजबूत दावेदारों में गिने जा रहे हैं। वह अभी अतिरिक्त मुख्य सचिव (जनजातीय विकास) का कार्यभार देख रहे हैं। चंबा के पांगी क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले शर्मा को बेहतरीन प्रशासनिक अनुभव और मजबूत राजनीतिक स्वीकार्यता हासिल है।
क्या सुक्खू के पसंदीदा अधिकारी को मिलेगी कमान
विमल नेगी मौत मामले की जांच रिपोर्ट के बाद सरकार ने ओंकार शर्मा से कई अहम विभाग वापस लिए थे। इस बीच 1995 बैच के आईएएस अधिकारी भारत खेड़ा का नाम भी चर्चा में है। वह केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर उपभोक्ता मामले मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के पद पर तैनात हैं।
प्रशासनिक हलकों के अनुसार मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू अपनी कार्यशैली के मुताबिक भारत खेड़ा को चुन सकते हैं। भारत खेड़ा पहले मुख्यमंत्री सुक्खू के प्रधान सचिव रह चुके हैं। वह जनवरी 2024 में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर गए थे। मुख्यमंत्री का पसंदीदा होने के कारण उनका दावा बेहद मजबूत है।
मौजूदा मुख्य सचिव संजय गुप्ता को अक्टूबर 2025 में प्रबोध सक्सेना की सेवानिवृत्ति के बाद कार्यवाहक मुख्य सचिव बनाया गया था। वरिष्ठ होने के बावजूद उन्हें पहले शीर्ष पद नहीं मिला था। भाजपा शासन में आरडी धीमान और कांग्रेस शासन में प्रबोध सक्सेना को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
मुख्य सचिव की नियुक्ति पूरी तरह से मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार मानी जाती है। इसमें वरिष्ठता को नजरअंदाज करने के कई पुराने उदाहरण मौजूद हैं। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कई वरिष्ठों को छोड़कर वीसी फारका को यह जिम्मेदारी दी थी। अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री सुक्खू क्या फैसला लेते हैं।
Author: Sunita Gupta


