Soyameal Price Hike: सोयामील की आसमान छूती कीमतों से पोल्ट्री बिजनेस में मचा हड़कंप, क्या अब देश में महंगे हो जाएंगे चिकन और अंडे?

Delhi News: देश में सोयामील की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने से पोल्ट्री उद्योग गहरे संकट में घिर गया है। भारतीय सोयामील महंगा होने से विदेशों में खरीदार मिलना मुश्किल हो गया है। इस वजह से घरेलू बाजार में भी पोल्ट्री फीड की लागत तेजी से बढ़ गई है।

बढ़ते संकट को देखते हुए ऑल इंडिया पोल्ट्री ब्रीडर्स एसोसिएशन ने एक आपातकालीन बैठक बुलाई है। एसोसिएशन ने बाजार में संतुलन बनाने के लिए पोल्ट्री उत्पादों की कुल सप्लाई को तत्काल प्रभाव से २५ प्रतिशत तक घटाने का एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है।

सोयाबीन चारा महंगा होने से पोल्ट्री सेक्टर बेहाल

एसोसिएशन की इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता चेयरमैन बहादुर अली ने की। बैठक के बाद जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि पिछले एक महीने के भीतर सोयाबीन मील की कीमतों में ४० प्रतिशत से अधिक की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। इससे उत्पादन लागत बहुत बढ़ गई है।

लागत बढ़ने से देश भर के मुर्गी पालकों का मुनाफा पूरी तरह खत्म हो गया है। सोयाबीन पोल्ट्री सेक्टर के मुख्य आहार का सबसे बड़ा हिस्सा होता है। इसके महंगा होने से छोटे और सीमांत मुर्गी पालकों के सामने अब अपना व्यवसाय बंद करने का संकट आ गया है।

आगामी त्योहारों में मांग घटने की आशंका से लिया फैसला

एसोसिएशन के मुताबिक जुलाई से अक्टूबर के दौरान सावन, नवरात्रि और दुर्गा पूजा जैसे बड़े त्योहार आते हैं। इन महीनों में देश के बड़े हिस्से में चिकन और अंडों की खपत काफी गिर जाती है। मांग घटने और लागत बढ़ने से उद्योग भारी घाटे की ओर बढ़ रहा था।

इसी मंदी से बचने के लिए उद्योग ने पोल्ट्री उत्पादन में २५ प्रतिशत की बड़ी कटौती लागू की है। इस फैसले के तहत देश भर में पैरेंट ब्रीडर स्टॉक को तेजी से हटाया जा रहा है। अतिरिक्त पक्षियों को निकालने के लिए पोल्ट्री संचालक जल्दबाजी में कदम उठा रहे हैं।

औंधे मुंह गिरे ब्रीडर पक्षियों के दाम

उत्पादन घटाने की होड़ में पैरेंट ब्रीडर पक्षियों की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। पहले बाजार में जो ब्रीडर पक्षी लगभग १४० रुपये प्रति पक्षी के भाव पर बिक रहे थे, वे अब कौड़ियों के दाम यानी सिर्फ ६५ रुपये प्रति पक्षी पर बेचे जा रहे हैं।

उद्योग जगत का दावा है कि देश में सोयाबीन का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। इसके बावजूद बाजार में सट्टेबाजी और जमाखोरी के कारण कीमतें कृत्रिम रूप से बढ़ाई जा रही हैं। नेफेड के स्टॉक की बिक्री के दौरान भी कुछ सीमित समूहों ने बाजार को प्रभावित किया है।

Author: Rajesh Kumar

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