Delhi News: केंद्र सरकार ने देश की तेल कंपनियों को बड़ी राहत देने का एलान किया है। सरकार ने एक जून से शुरू होने वाले नए पखवाड़े के लिए पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन यानी एटीएफ पर लगने वाले एक्सपोर्ट ड्यूटी में भारी कटौती कर दी है।
शनिवार को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर ड्यूटी को घटाकर 1.5 रुपये प्रति लीटर तय किया है। इसके साथ ही अब डीजल के निर्यात पर 13.5 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ पर 9.5 रुपये प्रति लीटर की दर से शुल्क लगेगा।
वैश्विक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच राहत
केंद्र सरकार ने यह बड़ा कदम ऐसे समय पर उठाया है, जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े युद्ध के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की सप्लाई को लेकर गंभीर पाबंदियां लग गई हैं।
इस भीषण सैन्य संघर्ष की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास व्यापारिक जहाजों की आवाजाही में बड़ी बाधाएं पैदा हो गई हैं। तेल की कम आपूर्ति और बढ़ते भू-राजनीतिक दबाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा था।
हर पंद्रह दिनों में होती है टैक्स दरों की समीक्षा
वित्त मंत्रालय कच्चे तेल और ईंधन पर लगने वाले इस टैक्स की हर दो हफ्ते में समीक्षा करता है। यह टैक्स दर अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल, डीजल और एटीएफ की औसत कीमतों पर आधारित होती है। तेल कंपनियां वैश्विक दामों के हिसाब से मुनाफे पर टैक्स चुकाती हैं।
हालांकि, सरकार ने घरेलू उपयोग वाले पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया है। इसका सीधा मतलब यह है कि आम भारतीय उपभोक्ताओं को फिलहाल स्थानीय स्तर पर पेट्रोल-डीजल की महंगाई से कोई राहत नहीं मिलने वाली है।
मई महीने में बढ़ाई गई थी ईंधन पर ड्यूटी
निर्यात शुल्क में की गई यह नई कटौती सोलह मई को घोषित की गई दरों के मुकाबले काफी कम है। पिछले महीने सरकार ने घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए पेट्रोल पर निर्यात शुल्क बढ़ाकर 3 रुपये प्रति लीटर करने का फैसला किया था।
उस समय डीजल और एविएशन फ्यूल पर टैक्स घटाकर क्रमशः 16.5 रुपये प्रति लीटर और 16 रुपये प्रति लीटर किया गया था। इस बार सरकार ने वैश्विक बाजार की स्थिति को देखते हुए तीनों ही ईंधनों पर लगने वाले टैक्स को काफी घटा दिया है।
आखिर क्यों लागू किया गया था यह निर्यात शुल्क
सरकार ने इस विशेष निर्यात शुल्क को सत्ताइस मार्च दो हजार छब्बीस को पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बाद लागू किया था। इसमें विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क के साथ सड़क और बुनियादी ढांचा उपकर भी शामिल किया गया है ताकि राजस्व को मजबूत किया जा सके।
इस कड़े कदम का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में अत्यधिक निर्यात को रोकना था। सरकार वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में भारतीय बाजारों के लिए पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त घरेलू उपलब्धता और आपूर्ति हर हाल में सुनिश्चित करना चाहती है।
Author: Rajesh Kumar

