Himachal Pradesh News: मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्य में एक बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक नीतिगत घोषणा की है। सरकार अब अपनी महत्वाकांक्षी “ग्रीन पंचायत” योजना से होने वाली कुल कमाई का 25 प्रतिशत हिस्सा सीधे तौर पर समाज के सबसे कमजोर तबके यानी बेसहारा अनाथ बच्चों और विधवा महिलाओं के कल्याण पर खर्च करेगी।
सामाजिक सुरक्षा तंत्र को मजबूत बनाने की बड़ी कवायद
मुख्यमंत्री ने शिमला में बताया कि इस बड़े कदम से राज्य सरकार के सामाजिक सुरक्षा ढांचे को काफी मजबूती मिलेगी। सरकार का मुख्य विजन यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक रूप से पिछड़े और वंचित परिवारों को सीधे तौर पर आर्थिक लाभ मिले ताकि उनके जीवन स्तर में सुधार हो सके।
इस नई पर्यावरण नीति के अंतर्गत ग्रामीण स्तर पर वृक्षारोपण, टिकाऊ विकास और पर्यावरण संरक्षण के कार्यों को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। इन सस्टेनेबल गतिविधियों के माध्यम से पंचायतें अब अपने लिए स्वतंत्र राजस्व भी पैदा कर रही हैं। अब इसी कमाई का एक हिस्सा सामाजिक सरोकार में लगेगा।
अनाथ बच्चों और विधवाओं की सुरक्षा है पहली प्राथमिकता
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने साफ किया कि उनकी सरकार समाज के हर वर्ग के समग्र उत्थान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। बेसहारा अनाथ बच्चों और विधवा महिलाओं को बेहतर आर्थिक मदद और सामाजिक सुरक्षा देना वर्तमान राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं की सूची में सबसे ऊपर शामिल है।
राज्य सरकार का दृढ़ विश्वास है कि इस क्रांतिकारी निर्णय से न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक समानता को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों का जुड़ाव भी काफी गहरा होगा। यह नीति विकास और पर्यावरण को एक नई सामाजिक दिशा प्रदान करेगी।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार इस नई कल्याणकारी पहल से प्रदेश की ग्राम पंचायतें आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बन सकेंगी। इसके साथ ही गांवों के असहाय और जरूरतमंद नागरिकों के दैनिक जीवन में बहुत ही सकारात्मक और जमीनी बदलाव देखने को मिलेगा, जो एक बड़ी सफलता होगी।
पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में इस मानवीय घोषणा को मौजूदा सामाजिक नीतियों को बदलने वाला एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। सरकार के इस कदम की आम जनता और समाजशास्त्रियों द्वारा जमकर सराहना की जा रही है क्योंकि इससे बेसहारा लोगों को संबल मिलेगा।
Author: Sunita Gupta


