Delhi News: दक्षिण दिल्ली के हौजरानी क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड ने एक बेहद गंभीर संकट को उजागर कर दिया है। इस हादसे ने भारत और खासकर दिल्ली-एनसीआर (NCR) के मेडिकल टूरिज्म से जुड़ी एक ऐसी अनदेखी समस्या को सामने ला दिया है, जिसे अब तक दबाया जा रहा था।
देश-विदेश से इलाज के लिए दिल्ली पहुंचने वाले मरीजों के परिजनों के लिए सुरक्षित और किफायती आवास की भारी कमी है। सस्ते और सुरक्षित ठिकानों के न मिलने के कारण मजबूरन तीमारदारों को अनियमित और असुरक्षित होटलों का सहारा लेना पड़ता है, जो उनकी जान के लिए बड़ा खतरा बन जाते हैं।
छवि को पहुंच सकता है बड़ा नुकसान
स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की दिल दहला देने वाली घटनाएं एनसीआर की उस वैश्विक छवि को भारी नुकसान पहुंचा सकती हैं, जिसके दम पर यह क्षेत्र देश का सबसे बड़ा मेडिकल टूरिज्म हब बना है। बुनियादी सुविधाओं की कमी अब इस पूरे सेक्टर पर भारी पड़ रही है।
केंद्र सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में कुल 6,44,387 विदेशी मरीज चिकित्सा सेवाओं के लिए भारत आए थे। वहीं, वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 7,07,244 तक पहुंच गई। भारत का मेडिकल वैल्यू ट्रैवल बाजार वर्तमान में लगभग 8.7 अरब डॉलर (करीब 72 हजार करोड़ रुपये) का है।
बुनियादी ढांचे का नहीं हुआ विकास
इस विशाल उद्योग में दिल्ली-एनसीआर की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण मानी जाती है। यहां एम्स, सफदरजंग और आरएमएल जैसे बड़े सरकारी संस्थानों के साथ-साथ कई नामी निजी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल मौजूद हैं। लेकिन मरीजों के तीमारदारों के लिए ठहरने का बुनियादी ढांचा तैयार करने में सरकारी और निजी तंत्र पूरी तरह विफल रहा है।
अस्पतालों के बाहर फुटपाथों, पार्कों और बेहद तंग कमरों में रहने को मजबूर तीमारदारों का दृश्य बेहद आम हो चुका है। निजी अस्पतालों के आसपास बने होटल और गेस्ट हाउस काफी महंगे होते हैं। यही वजह है कि लोग सस्ते के चक्कर में हौजरानी के ‘फ्लोरेंस इन’ जैसे असुरक्षित होटलों में रुकते हैं, जहां 21 जिंदगियां आग की भेंट चढ़ गईं।
सिर्फ इलाज नहीं, सुरक्षा भी है जरूरी
टूरिज्म और स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञ रोहित बजाज का कहना है कि मेडिकल टूरिज्म केवल अस्पताल के भीतर अच्छे इलाज तक सीमित नहीं होता है। भारत आने वाले मरीज और उसके साथ आए परिजनों का संपूर्ण अनुभव इसकी सफलता तय करता है। अगर सुरक्षित आवास और विश्राम गृह नहीं बने, तो विदेशी मरीज भारत आना बंद कर देंगे।
हौजरानी की इस दर्दनाक घटना ने साफ संकेत दे दिया है कि विश्वस्तरीय अस्पतालों के निर्माण के साथ-साथ मरीजों के परिजनों के लिए भी सुरक्षित व्यवस्था विकसित करना अब समय की मांग है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2020 से 2024 के बीच देशभर के अस्पतालों और उनके आस-पास आग लगने से 117 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।
Author: Gaurav Malhotra


