यमुना में अमोनिया का जहर: दिल्ली में गहराया जल संकट, वजीराबाद और चंद्रावल प्लांट से सप्लाई प्रभावित!

Delhi News: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली एक बार फिर भीषण जल संकट की चपेट में है। यमुना में अमोनिया का स्तर बढ़ने और हरियाणा से पानी की आपूर्ति कम मिलने के कारण दिल्ली के दो प्रमुख जल शोधन संयंत्रों (WTP) वजीराबाद और चंद्रावल में पानी का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस समस्या से नई दिल्ली और उत्तरी दिल्ली के कई इलाकों में रहने वाले लोग पेयजल की भारी किल्लत का सामना कर रहे हैं।

दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के अधिकारियों के अनुसार, वजीराबाद डब्ल्यूटीपी को अपनी क्षमता से लगभग 10 प्रतिशत कम कच्चा पानी प्राप्त हो रहा है, जबकि चंद्रावल डब्ल्यूटीपी में 15 प्रतिशत तक उत्पादन घट गया है। वजीराबाद संयंत्र की कुल क्षमता 138 एमजीडी और चंद्रावल की 99 एमजीडी है। दोनों संयंत्रों से होने वाली इस कटौती ने शहर की जलापूर्ति व्यवस्था को लड़खड़ा दिया है।

समस्या का मुख्य कारण: अमोनिया और आपूर्ति में कमी

यमुना के पानी में अमोनिया की बढ़ती मात्रा जल शोधन संयंत्रों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। अमोनिया का स्तर बढ़ने से पानी को पीने योग्य बनाने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है, जिससे संयंत्र पूरी क्षमता से काम नहीं कर पाते। इसके साथ ही, पड़ोसी राज्य हरियाणा से पानी की कम आपूर्ति ने इस संकट को और अधिक गंभीर बना दिया है।

स्थानीय निवासी पानी के लिए टैंकरों पर निर्भर होने को मजबूर हैं, जिससे लोगों की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हुई है। दिल्ली जल बोर्ड ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए हरियाणा सरकार के साथ बातचीत तेज कर दी है। अधिकारियों का मानना है कि यदि पानी का प्रवाह सुचारू होता है, तो अमोनिया के स्तर को कम करने में भी मदद मिलेगी।

अगले दो दिनों में सुधार की उम्मीद

जल बोर्ड के आला अधिकारियों ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है। उनका कहना है कि हरियाणा के साथ जारी वार्ता सकारात्मक दिशा में है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले 48 घंटों यानी दो दिनों के भीतर स्थिति में सुधार होगा और संयंत्रों में पानी का उत्पादन वापस सामान्य स्तर पर आ जाएगा। फिलहाल, प्रभावित क्षेत्रों में वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है।

दिल्ली प्रशासन ने लोगों से पानी का विवेकपूर्ण उपयोग करने की अपील की है। आने वाले दिनों में जल आपूर्ति की स्थिति में सुधार होते ही लोगों को राहत मिलने की संभावना है। तब तक के लिए प्रभावित इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है ताकि निवासियों को पेयजल संबंधी समस्याओं का कम से कम सामना करना पड़े।

Author: Gaurav Malhotra

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