‘बचपन का प्यार’ पर कानूनी चाबुक: दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, बिना अनुमति गीत इस्तेमाल करने पर लगाई रोक!

New Delhi News: दिल्ली हाई कोर्ट ने सोशल मीडिया पर वायरल हुए मशहूर गीत ‘बचपन का प्यार’ के अनधिकृत उपयोग के खिलाफ एक सख्त अंतरिम आदेश जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि इस गीत और इसकी चर्चित हुक लाइन ‘जाने मेरी जानेमन, बचपन का प्यार भूल नहीं जाना रे’ का व्यावसायिक इस्तेमाल बिना अनुमति के नहीं किया जा सकता।

न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने यह आदेश आइवी एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर कॉपीराइट उल्लंघन के मुकदमे पर सुनवाई के दौरान दिया। अदालत ने विभिन्न यूट्यूब चैनलों और अज्ञात प्रतिवादियों को तत्काल प्रभाव से इस गीत, इसकी धुन या इसके किसी भी हिस्से को प्रसारित करने, वितरित करने या व्यावसायिक लाभ के लिए उपयोग करने से प्रतिबंधित कर दिया है।

कॉपीराइट अधिकारों को लेकर स्पष्टता

आइवी एंटरटेनमेंट का दावा है कि कंपनी ने 7 नवंबर 2025 को हुए एक बौद्धिक संपदा अधिकार अधिग्रहण समझौते के तहत ‘बचपन का प्यार’ सहित कुल 1,250 गीतों और उनसे संबंधित यूट्यूब चैनल के कॉपीराइट अधिकार हासिल किए थे। कंपनी ने अदालत को बताया कि अप्रैल 2026 में उन्हें जानकारी मिली कि कई यूट्यूब चैनल्स बिना किसी अनुमति के इस गीत का दुरुपयोग कर रहे हैं।

कोर्ट ने माना कि प्रथम दृष्टया इस गीत के कॉपीराइट अधिकार आइवी एंटरटेनमेंट के पास ही हैं। आदेश में यह भी कहा गया है कि प्रतिवादी बिना अनुमति के इस गीत का उपयोग करके अवैध रूप से आर्थिक लाभ कमा रहे हैं, जिससे वादी कंपनी को भारी वित्तीय नुकसान हो रहा है। कोर्ट ने प्रतिवादियों को अपनी अवैध कमाई का पूरा ब्योरा अदालत में जमा करने का निर्देश दिया है।

अगली सुनवाई की तारीख तय

इस कानूनी लड़ाई में अदालत ने प्रतिवादियों को फिलहाल किसी भी प्रकार की गतिविधियों पर रोक लगाने का आदेश दिया है। मामले की अगली कड़ी में अब प्रतिवादियों को अपना पक्ष रखने और आर्थिक लाभ का विवरण सौंपना होगा। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला उन लोगों के लिए एक सबक है जो बिना कॉपीराइट लिए वायरल कंटेंट का व्यावसायिक लाभ उठाते हैं।

इस मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त को संयुक्त रजिस्ट्रार के समक्ष निर्धारित की गई है। इसके बाद, 21 अक्टूबर को यह मामला पुनः हाई कोर्ट में सूचीबद्ध किया जाएगा। तब तक के लिए सभी प्रतिवादियों को अदालत के अंतरिम आदेश का पालन करना अनिवार्य होगा। संगीत जगत में बौद्धिक संपदा अधिकारों की सुरक्षा के लिहाज से इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Author: Adv Anuradha Rajput

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