Kullu News: हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत पार्वती घाटी एक बार फिर किसी अनहोनी की गवाह बनी है। दिल्ली से मलाणा घूमने आया 24 साल का एक पर्यटक संदिग्ध हालात में लापता हो गया है। मणिकर्ण पुलिस ने इस संबंध में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर ली है। मोहित चौधरी नाम का यह युवक अपने दोस्तों के साथ छुट्टियां मनाने आया था। पुलिस की कई टीमें अब घने जंगलों और दुर्गम रास्तों में उसकी तलाश कर रही हैं।
मोहित चौधरी दिल्ली के सदर बाजार का रहने वाला है। वह 7 मई को अपने दोस्तों के साथ कुल्लू पहुंचा था। 10 मई की शाम को यह पूरा ग्रुप मलाणा की प्रसिद्ध वाइचिन घाटी के एक कैफे में ठहरा था। मोहित ने अपने दोस्तों से कहा कि वह पास से कुछ सामान लेने जा रहा है। घंटों इंतजार के बाद भी जब वह वापस नहीं लौटा, तो दोस्तों के हाथ-पांव फूल गए। उसका मोबाइल फोन भी लगातार स्विच ऑफ आ रहा है।
एसपी कुल्लू मदन लाल कौशल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है। पुलिस की विशेष टीमें स्थानीय लोगों की मदद से इलाके की खाक छान रही हैं। एसपी ने पर्यटकों से एक खास अपील भी की है। उन्होंने कहा कि बिना प्रोफेशनल गाइड या रजिस्ट्रेशन के अनजान रास्तों पर जाना जानलेवा हो सकता है। पहाड़ी इलाकों में मौसम और रास्ते पलक झपकते ही बदल जाते हैं, जो खतरनाक साबित होते हैं।
20 सालों में 1000 से ज्यादा लोग हुए गायब
पार्वती घाटी में पर्यटकों के गायब होने का इतिहास बेहद डरावना रहा है। आधिकारिक पुलिस आंकड़ों के मुताबिक, साल 2003 से 2023 के बीच यहां 1078 लोग लापता हुए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से केवल 498 लोगों का ही पता चल सका है। आज भी 580 लोग ऐसे हैं, जिनका कोई सुराग नहीं मिला। यह आंकड़े इस घाटी को दुनिया के सबसे रहस्यमयी पर्यटन स्थलों में से एक बना देते हैं।
इस घाटी के खौफनाक रास्तों ने केवल भारतीय ही नहीं, बल्कि विदेशी पर्यटकों को भी निगला है। साल 1991 से अब तक कुल्लू जिले से 19 विदेशी नागरिक लापता हो चुके हैं। इनमें पोलैंड के ब्रूनो मुशालिक और अमेरिका के मशहूर पर्यटक जस्टिन अलेक्जेंडर शेटलर जैसे नाम शामिल हैं। इन लोगों को ढूंढने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सर्च अभियान चलाए गए, लेकिन सालों बाद भी जांच एजेंसियां खाली हाथ ही रहीं।
एडवेंचर या मौत का बुलावा? क्यों होते हैं ये हादसे
स्थानीय प्रशासन और जानकारों का मानना है कि इन हादसों की मुख्य वजह लापरवाही है। पर्यटक अक्सर एडवेंचर के चक्कर में तय रास्तों को छोड़कर घने जंगलों की ओर निकल जाते हैं। बिना किसी गाइड के अनजान रास्तों पर भटकना उन्हें गहरी खाइयों तक ले जाता है। कई बार पर्यटक पहाड़ों की ढलान से सीधे उफनती नदियों में जा गिरते हैं। तेज बहाव के कारण शवों का मिलना भी नामुमकिन हो जाता है।
पार्वती घाटी के कुछ इलाके बेहद दुर्गम हैं जहां मोबाइल नेटवर्क भी काम नहीं करता। एक छोटी सी चूक यहां जिंदगी भर का पछतावा बन जाती है। मोहित चौधरी के लापता होने के बाद वाइचिन घाटी में सन्नाटा पसरा हुआ है। पुलिस मोहित के दोस्तों से भी पूछताछ कर रही है ताकि उसके आखिरी लोकेशन का सटीक पता लग सके। फिलहाल, पूरा रेस्क्यू अमला मोहित की सुरक्षित वापसी की कोशिशों में जुटा हुआ है।


