सुप्रीम कोर्ट में बढ़ गई जजों की संख्या, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के बड़े फैसले से हिली न्यायिक व्यवस्था

Delhi News: भारत की न्यायिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी और सुदृढ़ बनाने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में जजों के खाली पदों और बढ़ते कार्यभार को देखते हुए एक नए संशोधन अध्यादेश को अपनी मंजूरी दे दी है। इसके तहत अब देश की शीर्ष अदालत में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या को 33 से बढ़ाकर 37 कर दिया गया है। इस संख्या में भारत के मुख्य न्यायाधीश का पद शामिल नहीं है।

लंबित मुकदमों के जल्द निपटारे के लिए उठाया कदम

इस ऐतिहासिक संशोधन अध्यादेश का मुख्य उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट में लंबित मुकदमों के भारी बोझ को कम करना है। सरकार को उम्मीद है कि नए जजों की नियुक्ति होने से मुकदमों की सुनवाई में तेजी आएगी। इससे देश के आम नागरिकों को समय पर न्याय मिल सकेगा। केंद्रीय कानून और न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट साझा करके इस महत्वपूर्ण फैसले की आधिकारिक जानकारी देश के साथ साझा की है।

सुप्रीम कोर्ट अधिनियम 1956 में किया गया बड़ा बदलाव

केंद्रीय कानून मंत्री के मुताबिक राष्ट्रपति मुर्मु ने सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) अधिनियम, 1956 में आवश्यक संशोधन करने वाले अध्यादेश को हरी झंडी दिखाई है। केंद्र सरकार का यह फैसला उस समय आया है जब न्यायपालिका पर मुकदमों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा था। इस कदम से अदालत की कार्यक्षमता में काफी सुधार होने की संभावना है। सरकार लंबे समय से जजों की संख्या में बढ़ोतरी करने पर विचार कर रही थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट ने दी थी हरी झंडी

इस नए अध्यादेश को जारी करने से पहले केंद्र सरकार की कैबिनेट ने प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 5 मई को हुई कैबिनेट की बैठक में इस विषय पर गहन चर्चा हुई थी। बैठक में ‘सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026’ को संसद में पेश करने पर सहमति बनी थी। इसके बाद ही इस कानूनी प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए अध्यादेश का रास्ता चुना गया।

समय की मांग के अनुसार बदलती रही जजों की संख्या

भारत सरकार के नीति निर्माताओं का मानना है कि शीर्ष अदालत में बढ़ता कामकाज इस फैसले की मुख्य वजह है। देश में सुप्रीम कोर्ट के जजों के पद निर्धारित करने से जुड़ा पहला कानून साल 1956 में अस्तित्व में आया था। इसके बाद से देश की जनसंख्या और अदालती मुकदमों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ इस कानून में कई बार जरूरी बदलाव किए जा चुके हैं। यह बदलाव न्यायपालिका की बढ़ती जरूरतों को पूरा करते हैं।

साल 2019 के बाद अब चीफ जस्टिस सहित होंगे 38 जज

इससे पहले केंद्र सरकार ने साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट के जजों की स्वीकृत संख्या को 30 से बढ़ाकर 33 किया था। अब साल 2026 में हुए इस नए संशोधन के बाद देश की सबसे बड़ी अदालत का ढांचा पूरी तरह बदल जाएगा। नए अध्यादेश के प्रभाव में आने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को मिलाकर कुल जजों की संख्या 38 हो जाएगी। इसे देश में समय पर न्याय दिलाने की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।

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