Delhi News: लुटियंस दिल्ली के दिल में बसा ऐतिहासिक दिल्ली जिमखाना क्लब अब हमेशा के लिए इतिहास बनने जा रहा है। केंद्र सरकार ने एक बेहद बड़ा और कड़ा फैसला लेते हुए इस आलीशान क्लब की सत्ता को पूरी तरह उखाड़ फेंकने का आदेश दिया है। सरकार ने इस वीवीआईपी परिसर को खाली करने की तारीख भी तय कर दी है।
प्रधानमंत्री आवास के ठीक सामने स्थित इस 27.3 एकड़ के विशाल ठिकाने को अब देश की सुरक्षा के लिए समर्पित किया जाएगा। इस ऐतिहासिक फैसले से दिल्ली के सियासी और प्रशासनिक गलियारों में भारी भूचाल आ गया है। पैसे और रूतबे का यह अभेद्य साम्राज्य अब ताश के पत्तों की तरह पूरी तरह ढहने वाला है।
देश की सुरक्षा के लिए लीज डीड रद्द
केंद्रीय मंत्रालय ने आधिकारिक नोटिस जारी कर इस पूरे परिसर को खाली करने का निर्देश दिया है। सरकार ने इस कार्रवाई के पीछे देश की संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील कारणों का हवाला दिया है। आदेश के मुताबिक यह पूरा भूखंड बेहद रणनीतिक क्षेत्र में आता है। इसकी जरूरत रक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए है।
भूमि एवं विकास कार्यालय ने क्लब के साथ हुई लीज डीड की धारा 4 के तहत शक्तियों का इस्तेमाल किया है। सरकार ने इस पुराने पट्टे को तत्काल प्रभाव से पूरी तरह समाप्त कर दिया है। सरकार ने साफ किया है कि 5 जून को सरकारी अधिकारी इस जमीन का शांतिपूर्ण कब्जा अपने हाथों में वापस ले लेंगे।
अति-विशिष्ट विंग के विस्तार की बड़ी तैयारी
सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से इस पूरे क्षेत्र को नियंत्रित करने की योजना पर लगातार काम कर रही थीं। इस अति-संवेदनशील जमीन का उपयोग आने वाले समय में रक्षा मंत्रालयों के खास कार्यालयों के लिए होगा। यहां राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अति-विशिष्ट विंग के विस्तार की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली गई है।
प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि 5 जून को होने वाली इस री-एंट्री प्रक्रिया में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए। इस तारीख को जमीन के साथ-साथ वहां निर्मित सभी ऐतिहासिक इमारतें और खेल परिसर राष्ट्रपति के अधीन हो जाएंगे। कब्जा सौंपने में विवाद होने पर कानून सम्मत बल प्रयोग किया जाएगा।
लाखों की मेंबरशिप के लिए तरसते थे रसूखदार
दिल्ली जिमखाना क्लब में उद्योगपतियों और बड़ी कंपनियों के लिए 20 लाख रुपये की भारी-भरकम कॉर्पोरेट मेंबरशिप हुआ करती थी। इसके बावजूद लोग सालों-साल सिर्फ एक सदस्यता के लिए वेटिंग लिस्ट में तरसते रहते थे। वहीं गैर-सरकारी या निजी श्रेणी के रसूखदार नागरिकों को 5 से 10 लाख रुपये खर्च करने पड़ते थे।
निजी क्षेत्र के डॉक्टरों और वकीलों को क्लब की सदस्यता के लिए 15 से 25 साल लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ता था। दूसरी तरफ सरकारी श्रेणी के सिविल सर्वेंट्स जैसे आईएएस, आईपीएस और सैन्य अधिकारियों के लिए शुरुआती फीस 1.5 लाख से 2 लाख रुपये थी। इसमें वेटिंग पीरियड तुलनात्मक रूप से काफी कम होता था।
क्लब के सभी सदस्यों से सुविधाओं के रखरखाव के एवज में हर महीने बेहद मामूली मेंटेनेंस शुल्क लिया जाता था। इस वीवीआईपी क्लब में रोजाना सैकड़ों आम नागरिकों, मेहमानों और विदेशी नागरिकों की भारी आवाजाही होती थी। प्रधानमंत्री आवास के बिल्कुल करीब होने के कारण सुरक्षा एजेंसियां इसे बड़ा खतरा मान रही थीं।
केंद्र सरकार का यह बड़ा कदम यह साफ तौर पर दर्शाता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक हितों के सामने कोई समझौता नहीं होगा। अब देश की संप्रभुता के आगे कोई भी रसूखदार लॉबी या बड़ा दबाव काम नहीं आएगा। सरकार ने दिल्ली के इस सबसे बड़े पावर सेंटर को खाली कराने की तैयारी पूरी कर ली है।
Author: Gaurav Malhotra

