New Delhi News: उद्योगपति गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अमेरिकी न्याय विभाग ने सोमवार को उनके खिलाफ चल रहे सभी आपराधिक आरोप हमेशा के लिए वापस ले लिए हैं। इसके साथ ही न्यूयॉर्क की अदालत में चल रहा धोखाधड़ी का यह हाई-प्रोफाइल मामला पूरी तरह बंद हो गया है।
अमेरिकी अभियोजकों ने माना कि वे इन आरोपों को साबित नहीं कर सकते। यह फैसला ऐसे समय आया है जब अडानी एंटरप्राइजेज ने अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के साथ एक अलग समझौता किया है। कंपनी ने सत्ताईस करोड़ पचास लाख डॉलर का भारी भुगतान कर ईरान प्रतिबंधों से जुड़े मामले को पूरी तरह सुलझा लिया है।
अमेरिकी न्याय विभाग ने अदालत में एक विशेष अर्जी दायर की थी। इस अर्जी में अडानी के खिलाफ लगाए गए अभियोग को ‘विथ प्रिज्युडिस’ खारिज करने का कड़ा अनुरोध किया गया था। इसका मतलब है कि भविष्य में इस मामले को दोबारा कभी नहीं खोला जा सकेगा। अमेरिकी आपराधिक कार्यवाही में ऐसा होना बेहद दुर्लभ है।
अमेरिकी कोर्ट ने मामले पर क्या अहम फैसला दिया?
न्याय विभाग ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि उन्होंने इस मामले की बहुत गहन समीक्षा की है। विभाग ने अपने विशेषाधिकार का उपयोग करते हुए तय किया कि अब इन आपराधिक आरोपों पर और संसाधन नहीं लगाए जाएंगे। इसके बाद अदालत ने सभी आरोपों को हमेशा के लिए खारिज करने का ऐतिहासिक आदेश दिया।
रिश्वत और धोखाधड़ी से जुड़ा क्या था पूरा मामला?
साल दो हजार चौबीस के अंत में अमेरिकी नियामक एसईसी और न्याय विभाग ने कुछ मामले दर्ज किए थे। इनमें आरोप लगाया गया था कि अडानी ग्रुप ने भारत में सौर ऊर्जा के बड़े ठेके हासिल करने के लिए भारी रिश्वत देने की योजना बनाई थी। भारतीय अधिकारियों को साढ़े छब्बीस करोड़ रुपये देने का आरोप था।
यह भी आरोप था कि कंपनी ने अमेरिकी निवेशकों से पूंजी जुटाते समय इस पूरी योजना को छिपाया था। सूत्रों के मुताबिक अमेरिकी अभियोजकों को मामले में कोई स्पष्ट अमेरिकी लिंक नहीं मिला। आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूतों की भी भारी कमी थी। इसके बाद ही इस मामले को पूरी तरह बंद किया गया।
कानूनी टीम की रणनीति और निवेश का बड़ा वादा
इस बहुप्रतीक्षित फैसले के पीछे अडानी समूह की मजबूत कानूनी टीम की आक्रामक पैरवी है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार आरोपों को हटाने की जमीन पिछले महीने ही तैयार हो गई थी। अडानी के वकील रॉबर्ट गिफ्रा ने न्याय विभाग को स्पष्ट रूप से बताया था कि मामला चलने तक अमेरिका में निवेश कतई संभव नहीं है।
गौतम अडानी ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भारी निवेश को लेकर एक बहुत बड़ा ऐलान किया था। उन्होंने अमेरिका में दस अरब डॉलर का निवेश करने और पंद्रह हजार नई नौकरियां पैदा करने का सार्वजनिक वादा किया था। यह बड़ा वादा डोनाल्ड ट्रंप की हालिया चुनावी जीत के तुरंत बाद पूरे आत्मविश्वास के साथ किया गया था।
Author: Rajesh Kumar


