CJI सूर्यकांत की टिप्पणी पर भड़का गुस्सा, 600 दिग्गजों ने चिट्ठी लिखकर क्यों की बयान वापस लेने की मांग?

Delhi News: सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की एक मौखिक टिप्पणी पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। देश के 600 से अधिक पर्यावरणविदों, कानूनी विशेषज्ञों और पूर्व नौकरशाहों ने सीजेआई को एक खुला खत भेजा है। इस पत्र में उन्होंने प्रधान न्यायाधीश से अपने शब्द वापस लेने की मांग की है।

यह पूरा विवाद गुजरात के पिपावाव पोर्ट विस्तार से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान शुरू हुआ। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा था कि देश में याचिकाएं न्याय के लिए कम और विकास परियोजनाओं को रोकने के लिए ज्यादा दाखिल होती हैं। उन्होंने याचिकाकर्ताओं को ‘तथाकथित’ पर्यावरणविद् और आरटीआई एक्टिविस्ट कहा था।

सीजेआई की टिप्पणी से पर्यावरण प्रेमियों में बढ़ेगी हिचकिचाहट

खुले खत में कार्यकर्ताओं ने कहा कि सीजेआई के इस बयान से देश के छोटे किसानों, आदिवासियों, पशुपालकों और मछुआरों में गहरी चिंता है। शीर्ष अदालत के मंच से कही गई ऐसी बातों का समाज पर बहुत गहरा असर पड़ता है। इससे भविष्य में लोग पर्यावरण के नुकसान के खिलाफ आवाज उठाने से डरेंगे।

विशेषज्ञों ने दलील दी कि पर्यावरण सुरक्षा के लिए अदालत जाना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। भारतीय संविधान भी प्रत्येक नागरिक को नदी, झील, जंगल और वन्य जीवों को बचाने का मौलिक कर्तव्य सौंपता है। इसलिए विकास के नाम पर पर्यावरण को नजरअंदाज करने वाले फैसलों को चुनौती देना गलत नहीं है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की रिपोर्ट का दिया गया हवाला

दिग्गजों ने पत्र में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के आंकड़ों का भी जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि एनजीटी में आने वाली 80 फीसदी से अधिक आपत्तियां पूरी तरह जायज पाई जाती हैं। ऐसे में यह कहना गलत है कि पर्यावरण से जुड़े सभी मुकदमे सिर्फ विकास कार्यों को रोकने के लिए होते हैं।

पत्र के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में पहुंचने वाले कुल मामलों में पर्यावरण से जुड़ी जनहित याचिकाएं बहुत कम होती हैं। ऐसे में सीजेआई की यह टिप्पणी पूर्वाग्रह और पक्षपात से प्रेरित नजर आती है। इस तरह के बयानों से पर्यावरण के प्रति जागरूक लोगों का मनोबल पूरी तरह टूट जाता है।

पुराने ‘कॉकरोच’ वाले बयान से भी हुई थी किरकिरी

यह पहली बार नहीं है जब मुख्य न्यायाधीश अपने बयानों के कारण चर्चा में आए हैं। इससे पहले वे अपने ‘कॉकरोच’ वाले बयान के कारण सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल हुए थे। उन्होंने असफल युवाओं की तुलना कॉकरोच से करते हुए कहा था कि वे बाद में सोशल एक्टिविस्ट या मीडिया में चले जाते हैं।

उस विवाद के बाद सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम से एक नया पेज बना था, जिसने कुछ ही घंटों में लाखों फॉलोअर्स बटोर लिए थे। अब पर्यावरणविदों को लेकर की गई इस नई टिप्पणी ने न्यायपालिका और नागरिक समाज के बीच के तनाव को एक बार फिर से बढ़ा दिया है।

Author: Adv Anuradha Rajput

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