हिमाचल पंचायत चुनाव: रिकाउंटिंग के लिए मिलेंगे सिर्फ 10 मिनट, आयोग ने जारी की सख्त और नई गाइडलाइन

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Himachal Pradesh News: राज्य निर्वाचन आयोग ने हिमाचल प्रदेश पंचायती राज चुनाव में मतगणना प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए नए कड़े निर्देश जारी किए हैं। आयोग के सचिव सुरजीत सिंह राठौर ने सुरक्षा प्रबंधन और पुनर्मतगणना को लेकर बेहद सख्त नियम लागू कर दिए हैं।

पुनर्मतगणना के लिए लिखित आवेदन देना होगा अनिवार्य

नई गाइडलाइन के अनुसार वोटों की गिनती पूरी होने के बाद रिटर्निंग अधिकारी सीधे परिणाम की घोषणा करेंगे। इसके तुरंत बाद असंतुष्ट प्रत्याशियों को रिकाउंटिंग की मांग के लिए केवल 10 मिनट का समय मिलेगा। उम्मीदवारों को इसके लिए लिखित में आवेदन देना बेहद अनिवार्य होगा।

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आयोग ने साफ किया कि मौखिक अनुरोध को अधिकारी किसी भी हाल में स्वीकार नहीं करेंगे। रिटर्निंग अधिकारी इस आवेदन को स्वीकार या खारिज कर सकते हैं। फैसला बदलने पर उन्हें लिखित कारण बताना होगा। अंतिम परिणाम घोषित होने के बाद रिकाउंटिंग की मांग बिल्कुल नहीं मानी जाएगी।

सामान्य परिस्थितियों में किसी भी प्रत्याशी को पुनर्मतगणना का केवल एक ही मौका मिलेगा। मुकाबला बराबरी पर छूटने पर भी दोबारा गिनती सिर्फ एक बार होगी। हालांकि विशेष परिस्थितियों में चुनाव अधिकारी अपने विवेकाधिकार का उपयोग कर सकते हैं। लापरवाही बरतने वाले अफसरों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी।

मतपत्रों की छंटनी के लिए अपनाएंगे त्रिस्तरीय व्यवस्था

पंचायत चुनाव में एक ही मतपेटी से तीन अलग-अलग रंगों के मतपत्र निकलेंगे। पेटी खोलने के बाद कर्मचारी सबसे पहले मतपत्रों को बिना खोले रंगों के आधार पर छांटेंगे। मतपत्र लेखा से मिलान के बाद ही प्रत्याशियों के पक्ष में पड़े मतों के 25-25 के बंडल बनाएंगे।

आयोग ने जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों के लिए भी पृथक व्यवस्था की है। वार्डों के मतपत्र आपस में मिश्रित न हों, इसके लिए विशेष सावधानी बरतने के आदेश दिए गए हैं। गोपनीयता बनाए रखने के लिए पोस्टल बैलेट को सामान्य मतपत्रों के साथ मिलाकर ही गिना जाएगा।

सीसीटीवी कैमरों और वीडियोग्राफी से होगी सीधी निगरानी

पूरी मतगणना प्रक्रिया की कड़ी निगरानी के लिए सभी केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य कर दिया है। संवेदनशील और अति संवेदनशील केंद्रों पर प्रशासन सीधे वेब-कास्टिंग की व्यवस्था करेगा। इन सभी कैमरों की वीडियो रिकॉर्डिंग को कम से कम तीन महीने तक सुरक्षित रखना होगा।

भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मतगणना कक्ष में केवल उसी वार्ड के एजेंट को बैठने की अनुमति मिलेगी, जिसकी गिनती चल रही होगी। हालांकि प्रधान और उपप्रधान पद के उम्मीदवार या उनके मुख्य एजेंट पूरी प्रक्रिया के दौरान मतगणना कक्ष के भीतर लगातार मौजूद रह सकते हैं।

राज्य निर्वाचन आयोग ने मतों की गिनती का क्रम भी पूरी तरह तय कर दिया है। मतगणना केंद्र पर सबसे पहले वार्ड सदस्यों के मतों की गिनती होगी। इसके पूरा होने के बाद ही उप-प्रधान और अंत में सबसे महत्वपूर्ण प्रधान पद के मतपत्रों की गिनती शुरू की जाएगी।

Author: Harikarishan Sharma

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