Haridwar News: हिंदू धर्म में सावन के पावन महीने का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस दौरान भगवान शिव के लाखों भक्त पवित्र गंगाजल लेकर कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं। आमतौर पर लोग इसे सिर्फ सावन से जोड़कर देखते हैं। हालांकि शास्त्रों के अनुसार साल के अन्य महीनों में भी इस यात्रा का विधान है।
जानिए सावन के अलावा किस महीने में होती है कांवड़ यात्रा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शिव भक्त फाल्गुन मास में आने वाली महाशिवरात्रि पर भी बड़े स्तर पर कांवड़ यात्रा निकालते हैं। इसके अलावा बहुत से श्रद्धालु हर महीने आने वाली मासिक शिवरात्रि पर भी हरिद्वार से जल लाते हैं। वे स्थानीय शिवालयों में जाकर भोलेनाथ का पवित्र जलाभिषेक करते हैं और आशीर्वाद पाते हैं।
पैदल यात्रा का आध्यात्मिक महत्व और इसके कड़े नियम
यह यात्रा केवल एक सामान्य परंपरा नहीं बल्कि गहरी आस्था और भक्ति का प्रतीक है। श्रद्धालु सुख-सुविधाओं का त्याग करके पूरी तरह नंगे पैर पैदल यात्रा करते हैं। रास्ते में ‘बम-बम भोले’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से पूरा माहौल शिवमय हो जाता है। यह कठिन साधना भक्तों को मानसिक शांति देती है।
इस पवित्र धार्मिक यात्रा का मुख्य उद्देश्य अपने भीतर के शिव तत्व को जगाना और अनुशासन सीखना है। वर्तमान समय में देश के विभिन्न हिस्सों से लोग इस पावन यात्रा का संकल्प लेते हैं। सच्ची श्रद्धा के साथ की गई यह पैदल यात्रा व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव और आध्यात्मिक शक्ति का संचार करती है।

