लखनऊ के मेडिकल छात्रों पर बड़ा रिसर्च: 70 फीसदी छात्र ‘नोमोफोबिया’ के शिकार, मोबाइल से दूरी बढ़ा रही बेचैनी

Lucknow News: मोबाइल फोन आज हमारे जीवन का इस कदर अहम हिस्सा बन चुका है कि इसके बिना रोजमर्रा के कामों की कल्पना करना भी असंभव लगता है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज में हुए हालिया शोध में बेहद चौंकाने वाले और चिंताजनक खुलासे सामने आए हैं।

- Advertisement -

पढ़ाई के तनाव और फोन की लत में मिला गहरा संबंध

इंडियन जर्नल ऑफ कम्युनिटी एंड फैमिली मेडिसिन में प्रकाशित इस शोध के मुताबिक, कॉलेज के करीब 70 प्रतिशत एमबीबीएस छात्र ‘नोमोफोबिया’ (नो मोबाइल फोन फोबिया) जैसी गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। डॉक्टरों की टीम ने पाया कि छात्रों में पढ़ाई के तनाव और फोन की लत के बीच बेहद गहरा संबंध है।

रिसर्च में शामिल छात्र और छात्राएं दोनों ही मिले ग्रसित

लोहिया संस्थान की डॉ. मिली सेंगर और डॉ. अनामिका चंद्रा समेत अन्य विशेषज्ञों द्वारा किए गए इस शोध में 418 मेडिकल छात्रों को शामिल किया गया था। जांच में सामने आया कि करीब 67.57 प्रतिशत छात्राएं और 70.39 प्रतिशत छात्र इस डिजिटल लत का पूरी तरह शिकार हो चुके हैं।

जानिए क्या है नोमोफोबिया और इसके मुख्य लक्षण

विशेषज्ञों के अनुसार, ‘नोमोफोबिया’ वह मानसिक स्थिति है जिसमें फोन से दूर होने, बैटरी खत्म होने या नेटवर्क जाने पर व्यक्ति को अत्यधिक घबराहट होने लगती है। इस बीमारी से ग्रसित व्यक्ति हर दस मिनट में अपना फोन चेक करता है, जिससे उसका मानसिक संतुलन प्रभावित होता है।

- Advertisement -

स्क्रीन टाइम कम करने और बेहतर नींद की सलाह

इस गंभीर समस्या से बचने के लिए शोधकर्ताओं ने कुछ बेहद महत्वपूर्ण और कड़े उपाय भी सुझाए हैं। छात्रों को पढ़ाई के दौरान छोटे-छोटे ब्रेक लेने, स्क्रीन टाइम को सीमित करने और शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए रोजाना भरपूर नींद लेने की सख्त हिदायत दी गई है।

- Advertisement -

बड़ी खबरें

Topics

Related Articles