New Delhi News: वित्तीय वर्ष 2025-26 के आर्थिक परिणाम वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की मजबूत क्षमता को दर्शाते हैं। मार्च 2026 को समाप्त हुई आखिरी तिमाही में देश ने लगभग 7.8 प्रतिशत की शानदार विकास दर दर्ज की है। यह लचीलापन अमेरिकी शुल्क दरों में बढ़ोतरी और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद हासिल हुआ है।
आरबीआई ने रेपो रेट को 5.25% पर रखा स्थिर
भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है। केंद्रीय बैंक ने रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का निर्णय लिया है। यह कदम बाजार में वित्तीय तरलता बनाए रखने और ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच घरेलू बजट को अनावश्यक दबाव से बचाने में मददगार साबित होगा।
विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए टैक्स में सौ फीसदी राहत
आरबीआई ने विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश पर पूंजीगत लाभ कर (कैपिटल गेन्स टैक्स) में सौ प्रतिशत राहत देने का बड़ा नीतिगत फैसला किया है। इस ऐतिहासिक निर्णय से भारतीय ऋण बाजार में लगभग पचास अरब डॉलर तक की विदेशी पूंजी आने का अनुमान लगाया गया है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उभार से निफ्टी आईटी सूचकांक 22% गिरा
भारतीय पूंजी बाजार से विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार धन निकालने के कारण सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र भारी दबाव में है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित वैश्विक कंपनियों के तेजी से उभरने के कारण निवेशकों की प्राथमिकताएं बदली हैं। इस तकनीकी प्रतिस्पर्धा के चलते भारत का निफ्टी आईटी सूचकांक 22 प्रतिशत से अधिक टूट चुका है।
फिक्स्ड डिपॉजिट पर उच्च ब्याज दर और बढ़ता ऋण-जीडीपी अनुपात
बैंकिंग क्षेत्र में उच्च ब्याज दरों के कारण बड़े जमाकर्ताओं के लिए बैंक जमा एक आकर्षक विकल्प बन गया है। बैंक फिलहाल 7.5 से आठ प्रतिशत तक का ब्याज दे रहे हैं, जिससे म्यूचुअल फंड का आकर्षण कम हुआ है। दूसरी ओर, देश का ऋण-जीडीपी अनुपात अनुमानित 56.1 प्रतिशत से बढ़कर 57.85 प्रतिशत पहुंच गया है।

