आईआईटी बॉम्बे के गोल्ड मेडलिस्ट ने ठुकराया 2.9 करोड़ का पैकेज, माता-पिता की सेवा के लिए कानपुर में खोली किराना दुकान

Kanpur News: समय और परिस्थितियां इंसान के जीवन को किस कदर बदल देती हैं, इसका जीता-जागता उदाहरण कानपुर के विवेक शर्मा हैं। आईआईटी बॉम्बे से बीटेक कंप्यूटर साइंस में गोल्ड मेडल हासिल करने वाले विवेक की एक बेहद भावुक और प्रेरक कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।

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सैन फ्रांसिस्को के स्टार्टअप से मिला था करोड़ों का ऑफर

सोशल मीडिया पोस्ट के मुताबिक, विवेक शर्मा को अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को स्थित एक नामी स्टार्टअप से करीब 2.4 लाख डॉलर यानी लगभग 2.9 करोड़ रुपये सालाना का शानदार पैकेज मिला था। इस बेहतरीन जॉब ऑफर में वीजा स्पॉन्सरशिप और रिलोकेशन जैसी तमाम अंतरराष्ट्रीय सुविधाएं भी शामिल थीं।

बेटे की उच्च शिक्षा के लिए माता-पिता ने बेचे थे गहने

विवेक कानपुर के एक बेहद साधारण मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता रेलवे में क्लर्क थे और मां बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती थीं। विवेक को कोटा में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कराने और पढ़ाने के लिए माता-पिता ने अपनी पूरी जमा-पूंजी लगाने के साथ ही गहने तक बेच दिए थे।

अमेरिका रवाना होने से ठीक पहले टूटना पड़ा दुखों का पहाड़

जब विवेक अमेरिका जाने की तैयारियों में जुटे थे, तभी उनके परिवार पर अचानक गंभीर स्वास्थ्य संकट आ गया। उनके पिता को दिल का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ा और उसी दौरान उनकी मां को भी कैंसर होने का पता चला। इस विकट परिस्थिति ने विवेक की पूरी जिंदगी का रुख ही बदल दिया।

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करोड़ों की नौकरी छोड़ घर के नीचे शुरू की छोटी सी दुकान

विवेक ने विदेश में शानदार करियर बनाने के बजाय अपने बीमार माता-पिता के साथ कानपुर में ही रहने का साहसिक फैसला किया। उन्होंने अपनी सुख-सुविधाएं छोड़कर घर के नीचे एक छोटी सी किराना दुकान खोली। इसके साथ ही, वे अब गरीब और जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त में कंप्यूटर कोडिंग भी सिखाते हैं।

सोशल मीडिया पर लोग कर रहे हैं जांबाज बेटे को सलाम

विवेक के इस फैसले की सोशल मीडिया पर हर कोई जमकर तारीफ कर रहा है। इंटरनेट यूजर्स का कहना है कि असली सफलता केवल बड़ा बैंक बैलेंस या मोटी सैलरी नहीं, बल्कि अपने माता-पिता के प्रति आभार जताना है। विवेक ने साबित किया है कि अपनों का साथ निभाना सबसे बड़ी कामयाबी है।

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