Delhi News: दिल्ली हाई कोर्ट ने सूचना के अधिकार (RTI) को लेकर एक बेहद बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने न्यूक्लियर पावर प्लांट की सुरक्षा विश्लेषण रिपोर्ट (SAR) को सार्वजनिक करने के केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के पुराने आदेश को पूरी तरह रद कर दिया है।
हाई कोर्ट ने न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) की अपील पर यह महत्वपूर्ण निर्णय दिया। अदालत ने माना कि तमिलनाडु के कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट की यूनिट-1 और 2 की सुरक्षा रिपोर्ट आरटीआई के तहत सार्वजनिक करने से पूरी तरह मुक्त है।
न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव की एकल पीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए फैसला सुनाया। पीठ ने कहा कि एनपीसीआईएल ने रशियन फेडरेशन के साथ हुए समझौते के तहत इस संवेदनशील रिपोर्ट को शुरू से ही बेहद गोपनीय श्रेणी में सुरक्षित रखा था।
देश की सुरक्षा और रणनीतिक हितों का हवाला
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह रिपोर्ट आरटीआई अधिनियम की धारा-8(1)(ई) के तहत आती है, इसलिए इसे सार्वजनिक करने से कानूनी छूट मिली हुई है। अदालत ने माना कि ऐसी संवेदनशील जानकारी बाहर आने से देश के वैज्ञानिक और रणनीतिक हितों पर बुरा असर पड़ सकता है।
इसके साथ ही कोर्ट ने आरटीआई अधिनियम की धारा-8(1)(ए) का भी हवाला दिया। अदालत के अनुसार, इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से देश के आर्थिक हितों के साथ-साथ रशियन फेडरेशन जैसे मित्र देश के साथ भारत के विदेशी संबंधों पर भी गंभीर आंच आ सकती थी।
यह पूरा विवाद साल 2010 में शुरू हुआ था, जब कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट के निर्माण के दौरान एक आरटीआई आवेदन दाखिल किया गया था। सामाजिक कार्यकर्ता एसपी उदयकुमार ने रिएक्टर-1 और 2 से जुड़ी सुरक्षा विश्लेषण और साइट इवैल्यूएशन रिपोर्ट की मांग की थी।
उस समय एनपीसीआईएल ने पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन रिपोर्ट तो दे दी थी, लेकिन सुरक्षा रिपोर्ट देने से साफ मना कर दिया था। विभाग का तर्क था कि इन दस्तावेजों में रिएक्टर डिजाइन से जुड़ी व्यावसायिक और प्रोप्राइटरी जानकारियां शामिल हैं, जिन्हें साझा नहीं किया जा सकता।
सीआईसी ने दिया था रिपोर्ट देने का आदेश
इसके बाद केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने अप्रैल 2012 में एक आदेश पारित किया था। सीआईसी ने एनपीसीआईएल को निर्देश दिया था कि वह डिजाइन की गोपनीय व्यावसायिक कड़ियों को हटाकर दोनों महत्वपूर्ण रिपोर्ट की कॉपियां आवेदक को सौंपे और इसे वेबसाइट पर भी अपलोड करे।
एनपीसीआईएल ने सीआईसी के इसी आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान एनपीसीआईएल ने अदालत को बताया कि साइट इवैल्यूएशन रिपोर्ट पहले ही आवेदक को दी जा चुकी है और याचिका दाखिल होने के बाद उसे आधिकारिक वेबसाइट पर भी डाल दिया गया है।
संस्था ने अदालत को यह भी याद दिलाया कि कुडनकुलम परमाणु परियोजना भारत और रूस के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण इंटर-गवर्नमेंटल एग्रीमेंट के तहत तैयार की गई है। इसलिए इस प्लांट की सुरक्षा से जुड़ी बारीक जानकारियां सार्वजनिक करना दोनों देशों के समझौते का उल्लंघन होता।
Author: Gaurav Malhotra


