हिमाचल हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, एनएच-5 किनारे अवैध ढाबे और बिलबोर्ड हटेंगे, पुलिस को सख्त निर्देश

Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग-5 पर बढ़ते अतिक्रमण और अवैध व्यावसायिक गतिविधियों पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को शिमला से रामपुर बुशहर तक सड़क किनारे बने अवैध प्रतिष्ठान, ढाबे और बिलबोर्ड हटाने के आदेश दिए हैं। साथ ही पुलिस और प्रशासन को नियमित निगरानी बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं।

राष्ट्रीय राजमार्ग पर अवैध कारोबार पर सख्त टिप्पणी

हाईकोर्ट ने साफ कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों को व्यावसायिक बाजार में नहीं बदला जा सकता। कोर्ट ने कहा कि व्यापार करने वालों की जिम्मेदारी है कि वे अपने लिए उचित निजी स्थान तलाशें। सार्वजनिक सड़कों और राजमार्गों पर कब्जा कर यातायात में बाधा पैदा करना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि राष्ट्रीय राजमार्ग-5 पर शिमला, ठियोग, नारकंडा, कुमारसैन और रामपुर बुशहर क्षेत्र में बने सभी अवैध व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को हटाया जाए। आदेश में खास तौर पर उन ढांचों और बिलबोर्डों का जिक्र किया गया है, जो निजी भूमि के बजाय सरकारी या वन भूमि पर खड़े किए गए हैं।

दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में बढ़ेगी निगरानी व्यवस्था

अदालत ने प्रशासन को दुर्घटना संभावित इलाकों में बेहतर प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं। साथ ही ट्रकों के लिए अलग पार्किंग सुविधाएं विकसित करने को कहा गया है। कोर्ट ने अवैध पार्किंग, अतिक्रमण और नए ढाबों या भोजनालयों के निर्माण पर तत्काल रोक लगाने और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई करने को भी कहा है।

पुलिस अधीक्षक शिमला को आदेश दिया गया है कि एसएचओ ढली के माध्यम से राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगातार गश्त सुनिश्चित की जाए। अदालत ने पर्याप्त संख्या में पुलिस कर्मियों की तैनाती पर भी जोर दिया। कोर्ट ने कहा कि सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

पर्यटकों को परेशान करने वालों पर होगी कार्रवाई

हाईकोर्ट ने पर्यटन सीजन के दौरान पर्यटकों से बदसलूकी और अवैध वसूली की शिकायतों पर भी चिंता जताई। अदालत ने पुलिस को निर्देश दिए कि बस ऑपरेटर, टैक्सी चालक और सड़क किनारे व्यवसाय चलाने वाले लोग किसी भी पर्यटक को परेशान न करें। शिकायत मिलने पर तुरंत सख्त कार्रवाई करने को कहा गया है।

याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया था कि कई ट्रक और टैक्सी ऑपरेटर राजनीतिक दबाव का इस्तेमाल कर नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। इससे सड़क पर जाम और हादसों का खतरा बढ़ रहा है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस को बिना किसी बाहरी दबाव के निष्पक्ष कार्रवाई करनी होगी और जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेह बनाया जाएगा।

लापरवाही पर अधिकारियों को कोर्ट की चेतावनी

अदालत ने चेतावनी दी कि यदि आदेशों का पालन नहीं हुआ तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई सहित कड़े कदम उठाए जाएंगे। कोर्ट ने शिमला के उपमंडल मजिस्ट्रेट और अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट को भी निर्देश दिए कि वे पूरे मामले की निगरानी करें और अवैध कब्जों को हटाने की प्रक्रिया समय पर पूरी कराएं।

Author: Sunita Gupta

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