स्पा, डांस ग्रुप और मसाज पार्लर में मासूम बच्चियों के यौन शोषण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र और एनसीपीसीआर से मांगा जवाब

Delhi News: देश के मसाज पार्लर, स्पा और डांस ग्रुप में बच्चों के यौन शोषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। सर्वोच्च अदालत ने सोमवार को एक गंभीर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और बाल अधिकार संस्थाओं को नोटिस जारी किया है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की तीन जजों की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। अदालत ने केंद्र सरकार के अलावा राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) से भी जवाब तलब किया है।

न्यायालय ने केंद्रीय श्रम मंत्रालय और कानून एवं न्याय मंत्रालय को भी अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं। बाल अधिकार समूह ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस’ (JRCA) की तरफ से वरिष्ठ वकील एच.एस. फूलका ने कोर्ट में दलीलें पेश कीं।

डांस बार और स्पा बने मानव तस्करी के अड्डे

सीनियर एडवोकेट एच.एस. फूलका ने अदालत को बताया कि महज 10 और 11 साल की नाबालिग लड़कियों को ऑर्केस्ट्रा और डांस बार में अवैध रूप से काम पर रखा जा रहा है। यह बच्चों के अधिकारों का क्रूर और खुला उल्लंघन है।

याचिका में आरोप लगाया गया कि पूरे देश में स्पा और मसाज पार्लर नाबालिग लड़कियों की संगठित तस्करी का केंद्र बन चुके हैं। इन छिपे हुए ठिकानों में मासूम बच्चों का भयानक यौन शोषण हो रहा है और उनसे जबरन मजदूरी कराई जा रही है।

वकील सोनाली जैन के माध्यम से दायर इस याचिका में ‘बाल और किशोर श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम’ (CALPRA), 1986 के कानूनी प्रावधानों में मौजूद गंभीर खामियों और विसंगतियों पर भी बड़े सवाल उठाए गए हैं।

कानून की कमियों का फायदा उठा रहे तस्कर

मौजूदा कानून के तहत खतरनाक पेशों को अनुसूची के भाग A में रखा गया है। इन क्षेत्रों में किशोरों के काम करने पर पूर्ण प्रतिबंध है। लेकिन स्पा और मसाज पार्लर अभी ‘पार्ट B’ में आते हैं, जहां इनका रोजगार केवल नियमित है।

इसके अलावा बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर सक्रिय ऑर्केस्ट्रा और डांस ग्रुप तो कानून की सूची में शामिल ही नहीं हैं। मानव तस्कर इसी कानूनी अस्पष्टता का फायदा उठाकर बच्चों का कमर्शियल यौन शोषण कर रहे हैं।

तस्कर इस घिनौने अपराध को वेलनेस और मनोरंजन इंडस्ट्री में एक कानूनी रोजगार का रूप दे देते हैं। याचिका में मांग की गई है कि 18 साल से कम उम्र के बच्चों के इन क्षेत्रों में काम करने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगे।

बिहार और बंगाल से रेस्क्यू की गईं 212 नाबालिग

अदालत में मार्च 2025 से मई 2026 के बीच चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन्स के चौंकाने वाले आंकड़े भी पेश किए गए। इसके मुताबिक बिहार और पश्चिम बंगाल के ऑर्केस्ट्रा समूहों से करीब 212 पीड़ित नाबालिगों को सुरक्षित बचाया गया है।

इसी तरह दिल्ली और राजस्थान के आलीशान मसाज पार्लरों और स्पा सेंटरों से भी 12 मासूम बच्चियों को मुक्त कराया गया। इन रेस्क्यू की गई पीड़ित बच्चियों में से कुछ की उम्र तो महज 12 साल दर्ज की गई है।

जांच में खुलासा हुआ कि इन मासूमों को ऑपरेटरों द्वारा 10,000 से 50,000 रुपये में खरीदा गया था। उन्हें कर्ज के जाल में फंसाकर बंधुआ मजदूर बनाया गया और नशे में धुत ग्राहकों के सामने अश्लील कपड़ों में परफॉर्म करने के लिए मजबूर किया गया।

Author: Adv Anuradha Rajput

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