Delhi News: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कर्जदारों को बड़ी राहत देते हुए लोन रिकवरी के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। आगामी एक अक्टूबर से बैंक केवल उन्हीं लोगों को रिकवरी एजेंट बना सकेंगे, जिन्होंने बकायदा ट्रेनिंग ली हो। यह नया नियम ग्राहकों की मानसिक सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
अब सिर्फ इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग एंड फाइनेंस (आईआईबीएफ) से प्रशिक्षित लोग ही रिकवरी कर सकेंगे। इसके साथ ही बैंकों को अपने ग्राहकों को पूरी रिकवरी एजेंसी और एजेंटों की विस्तृत जानकारी देनी होगी। अगर बैंक अपनी रिकवरी एजेंसी बदलता है, तो इसकी सूचना भी तुरंत उधार लेने वालों को देनी होगी।
काल करने का समय और सूचना देना हुआ अनिवार्य
नए दिशानिर्देशों के तहत नियुक्त रिकवरी एजेंसियों को यह गारंटी देनी होगी कि उनके एजेंट तय नियमों का उल्लंघन नहीं करेंगे। बैंक कर्मचारी या रिकवरी एजेंट अब ग्राहकों को सुबह आठ बजे से शाम सात बजे के बीच ही काल कर सकते हैं। ग्राहक की अनुमति के बिना इस समय के बाद फोन नहीं किया जाएगा।
किसी भी एजेंट को ग्राहक के घर भेजने से कम से कम एक दिन पहले बैंक को ई-मेल या मोबाइल मैसेज भेजना होगा। इस मैसेज में एजेंट की पूरी पहचान दी जाएगी। यदि ग्राहक का डिजिटल संपर्क नंबर नहीं है, तो तीन दिन पहले उसके घर के पते पर लिखित नोटिस भेजना अनिवार्य होगा।
शिकायत के निपटारे तक नहीं आएंगे रिकवरी एजेंट
आरबीआई के कड़े नियमों के अनुसार यदि किसी लोन लेने वाले व्यक्ति ने बैंक में कोई शिकायत दर्ज कराई है, तो उसका निपटारा होने तक बैंक किसी भी रिकवरी एजेंट को उसके घर नहीं भेज सकता है। इस नियम से ग्राहकों को बेवजह के मानसिक दबाव से बड़ी राहत मिलेगी।
बैंक कर्मचारियों या रिकवरी एजेंटों द्वारा की जाने वाली सभी काल की तारीख और समय का पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा। यदि बातचीत रिकॉर्ड की जा रही है, तो ग्राहक को पहले इसकी सूचना देना आवश्यक होगा। इस रिकॉर्डिंग को बैंकों को कम से कम छह महीने तक सुरक्षित रखना होगा।
बैंक को बातचीत रिकॉर्ड करने का ठोस कारण भी बताना होगा। लोन रिकवरी के लिए बैंक ग्राहक के मोबाइल या टैबलेट में किसी भी प्रकार की तकनीक का अनधिकृत इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। जब तक फोन बैंक लोन पर न खरीदा गया हो, बैंक उसे अपने कब्जे में नहीं ले सकता है।
Author: Rajesh Kumar

