जूनियर से कम सैलरी मिलने पर हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सीनियर कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले, तुरंत बढ़ेगा वेतन

Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने कर्मचारियों के हक में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ किया कि जूनियर को मिली वेतनवृद्धि से अगर सीनियर की सैलरी कम होती है, तो उसे तुरंत सुधारा जाए। कोर्ट के इस आदेश से हजारों वरिष्ठ कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा।

न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने डॉक्टर राजेंद्र शर्मा की याचिका स्वीकार करते हुए यह व्यवस्था दी। कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता और प्रोफार्मा प्रतिवादी के वेतन में बड़ा अंतर था। यह विसंगति केवल पीएचडी की उपाधि के लिए बाद में मिली अतिरिक्त वेतनवृद्धि के कारण पैदा हुई थी।

पीएचडी डिग्री की अतिरिक्त वेतनवृद्धि से पैदा हुआ था पूरा विवाद

याचिकाकर्ता भौतिकी के सहायक प्राध्यापक पद पर तैनात थे। उन्हें अपने ही जूनियर की तुलना में हर महीने कम वेतन मिल रहा था। इस विसंगति को दूर करने और अपना हक पाने के लिए पीड़ित प्रोफेसर ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनका तर्क था कि यह एक स्थापित कानून है।

वरिष्ठ कर्मचारी का कहना था कि सीनियर और जूनियर के वेतन में अंतर होने पर सीनियर का वेतन बढ़ाना अनिवार्य है। हालांकि, उच्च शिक्षा विभाग ने संयुक्त नियंत्रक-वित्त की राय का हवाला देकर वेतन बढ़ाने से साफ इनकार कर दिया था, जिसे कोर्ट ने पूरी तरह गलत माना।

अदालत ने वित्त विभाग की दलीलों को किया पूरी तरह खारिज

विभाग की राय थी कि उच्च योग्यता के कारण जूनियर को ज्यादा वेतन मिलना विसंगति नहीं है। प्रार्थी ने दलील दी कि जूनियर ने उनसे कोई उच्च डिग्री हासिल नहीं की थी। याचिकाकर्ता ने वर्ष 1994 में पीएचडी की थी, तब उन्हें केवल दो वेतनवृद्धियां दी गई थीं।

इसके विपरीत, जूनियर प्रतिवादी ने वर्ष 2008 में पीएचडी पूरी की। उस समय के नियमों के अनुसार पीएचडी करने पर तीन वेतनवृद्धियां अनुमेय थीं। इसी कारण जूनियर का वेतन सीनियर से अधिक हो गया, जिसे हाई कोर्ट ने पूरी तरह अतार्किक और भेदभावपूर्ण करार दिया है।

रिटायर्ड प्रोफेसर को तीन महीने में ब्याज समेत भुगतान करने का आदेश

हाई कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए सरकार को विसंगति की तारीख से ही वेतनमान ठीक करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने गंभीर रुख अपनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इसलिए उनकी बकाया राशि का भुगतान अगले तीन महीने के भीतर किया जाए।

अदालत ने आदेश में यह भी जोड़ा कि यदि तय समय पर भुगतान नहीं हुआ, तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। ऐसी स्थिति में विभाग को याचिका दायर करने की तिथि से छह प्रतिशत की दर से ब्याज देना होगा। इस फैसले से कर्मचारियों में खुशी की लहर है।

Author: Sunita Gupta

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