Chandigarh News: पंजाब में नगर निकाय चुनावों को लेकर ईवीएम और बैलेट पेपर के इस्तेमाल पर विवाद गहरा गया है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में गुरुवार को राज्य चुनाव आयोग और भारतीय चुनाव आयोग के बीच तीखी बहस हुई। दोनों आयोगों ने एक-दूसरे पर देरी और तालमेल की कमी के आरोप लगाए हैं।
राज्य चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया कि वे शुरू से एम-2 मॉडल की ईवीएम मांग रहे थे, लेकिन बाद में इन्हें पुराना बताकर एम-3 मॉडल देने की बात कही गई। आयोग का दावा है कि मशीनों की जांच और तकनीकी प्रक्रिया में लगने वाले समय के कारण चुनाव में देरी निश्चित थी, इसलिए बैलेट पेपर ही अब एकमात्र व्यावहारिक विकल्प है।
ईवीएम की उपलब्धता पर फंसा पेंच
राज्य चुनाव आयोग ने दलील दी कि 26 मई को मतदान है और प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। बैलेट पेपर की छपाई पर 50 लाख रुपये तक खर्च किए जा चुके हैं। आयोग के अनुसार, पोलिंग पार्टियों की ट्रेनिंग, सीलिंग और डेमो के लिए अब पर्याप्त समय नहीं बचा है, इसलिए बैलेट पेपर से चुनाव कराना अनिवार्य है।
वहीं, भारतीय चुनाव आयोग ने राज्य आयोग के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। आयोग ने कोर्ट को सूचित किया कि राजस्थान से 6,300 बैलेट यूनिट और करीब 6,000 कंट्रोल यूनिट पंजाब के लिए भेजी जा चुकी हैं, जो रात तक पहुंच जाएंगी। भारत निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया कि अब मशीनों की कोई कमी नहीं है और वे पूरी तरह तैयार हैं।
देरी का जिम्मेदार कौन?
भारतीय चुनाव आयोग ने कड़े लहजे में कहा कि पंजाब चुनाव आयोग ने समय रहते मशीनों की मांग नहीं की। नियमानुसार ईवीएम के लिए छह महीने पहले अनुरोध किया जाना चाहिए था, लेकिन प्रक्रिया बहुत देरी से शुरू हुई। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशिक्षित स्टाफ को नई मशीनों की जानकारी देने के लिए सिर्फ 15 मिनट का समय काफी है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट में एक दिलचस्प टिप्पणी भी हुई, जिसमें इसे ऐसी शादी जैसा बताया गया जहां सब कुछ उपलब्ध होने के बावजूद अब मना किया जा रहा है। सभी पक्षों की तीखी दलीलें सुनने के बाद पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब सबकी निगाहें कोर्ट के आगामी आदेश पर टिकी हैं।
Author: Gurpreet Singh


