International News: दुनिया की सबसे बड़ी ताकत अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तेवर अचानक बदल गए हैं। कुछ दिन पहले तक ट्रंप ईरान को पूरी तरह तबाह करने की धमकी दे रहे थे। अब वे युद्ध टालने और शांति की गुहार लगा रहे हैं। ट्रंप ने ईरान के पावर प्लांट पर हमले की अपनी योजना को पांच दिन के लिए रोक दिया है। कूटनीति की दुनिया में इसे ट्रंप का एक बड़ा ‘यू-टर्न’ माना जा रहा है। ट्रंप ने सत्ता में आते ही विदेशी युद्धों को खत्म करने का वादा किया था। फिर उन्होंने ईरान को युद्ध की आग में धकेलने की पूरी कोशिश की। अब वे इस युद्ध से बचने के लिए दुनिया भर में मध्यस्थों की तलाश कर रहे हैं। ट्रंप की ईरान नीति ने अब अपना एक पूरा चक्कर लगा लिया है।
हमले की धमकियों से खौफ तक का सफर
ट्रंप ने शुरुआत में ईरान के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अपनाया था। उन्होंने ईरान के तेल और बिजली ठिकानों को तबाह करने की सीधी चेतावनी दी थी। इसके जवाब में ईरान ने भी बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया। ईरान ने साफ कह दिया कि अगर उस पर कोई हमला हुआ, तो अंजाम बुरा होगा। तेहरान ने मिडिल ईस्ट में मौजूद सभी अमेरिकी ठिकानों को राख करने की चेतावनी दी। ईरान ने इजरायल, सऊदी अरब और यूएई के ठिकानों को भी निशाना बनाने की धमकी दी। इस खौफनाक चेतावनी के बाद अमेरिकी प्रशासन में बुरी तरह हड़कंप मच गया। ट्रंप को एहसास हो गया कि ईरान से सीधी जंग अमेरिका के लिए भारी पड़ सकती है।
मध्यस्थों की तलाश और कूटनीतिक ड्रामा
अमेरिका अब इस खतरनाक युद्ध को टालने के लिए हर संभव कोशिश कर रहा है। वाशिंगटन ने ईरान से बातचीत के लिए ओमान और पाकिस्तान जैसे देशों से संपर्क किया है। पर्दे के पीछे से कूटनीतिक प्रयास काफी तेज कर दिए गए हैं। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि ईरान समझौते के लिए बहुत बेताब है। उन्होंने यहां तक कहा कि ईरान के बड़े अधिकारियों ने उन्हें खुद फोन किया था। हालांकि, ईरान ने ट्रंप के इन सभी दावों को पूरी तरह झूठा बताया है। तेहरान का कहना है कि उसने अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं की है। ट्रंप के इस बयान को उनकी अपनी राजनीति चमकाने का एक तरीका माना जा रहा है।
ईरान की मिसाइलों के आगे पस्त हुआ अमेरिका?
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका इस समय ईरान से सीधा सैन्य टकराव बिल्कुल नहीं चाहता। अमेरिकी अर्थव्यवस्था पहले से ही कई मोर्चों पर भारी दबाव झेल रही है। अगर ईरान के साथ पूरी तरह युद्ध छिड़ता है, तो दुनिया भर में तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। इसका सीधा और बुरा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और आम अमेरिकी नागरिकों पर पड़ेगा। यही बड़ी वजह है कि ट्रंप अब सैन्य हमले की जगह कूटनीतिक समाधान खोज रहे हैं। ट्रंप की नीतियों की अब पूरी तरह से पोल खुल गई है। वे युद्ध खत्म करने के वादे से मुकर कर अब मध्यस्थों को ढूंढ़ रहे हैं। अमेरिका अब किसी भी तरह इस संकट से बाहर निकलने का सुरक्षित रास्ता तलाश रहा है।


