Technology News: भारतीय टेक उद्योग के दिग्गज श्रीधर वेम्बु ने देश को एक बेहद नायाब और बड़ा तकनीकी तोहफा दिया है। अब तक मुख्य रूप से वैश्विक सॉफ्टवेयर क्षेत्र में धाक जमाने वाली उनकी मशहूर कंपनी जोहो ने अपना पहला पूर्ण रूप से स्वदेशी सर्वर प्लेटफॉर्म ‘नाथू ला’ सफलता से लॉन्च कर दिया है।
इस बड़े क्रांतिकारी कदम के बाद जोहो कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा सेंटर के संचालन पर होने वाले भारी खर्च को काफी हद तक कम कर सकेगी। भारत में निर्मित यह पहला स्वदेशी सर्वर अब तक बाजार पर काबिज विदेशी टेक कंपनियों के दबदबे को बहुत सीधी और मजबूत चुनौती देगा।
नागपुर के फ्रेशर इंजीनियर्स ने मिलकर रचा नया इतिहास
इस आधुनिक ‘नाथू ला’ स्वदेशी सर्वर को बेंगलुरु या चेन्नई जैसे पारंपरिक टेक हब में नहीं बनाया गया है। इसे जोहो के नागपुर सेंटर में पूरी तरह डिजाइन और विकसित किया गया है। इसे तैयार करने वाली कोर टीम में कोई बहुत बड़े और नामचीन अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ शामिल नहीं थे।
जोहो के सेतु प्रोग्राम के माध्यम से कॉलेज से निकले फ्रेशर इंजीनियर्स ने इस असंभव काम को संभव बनाया है। इन युवा शोधकर्ताओं ने अमेरिकी चिप निर्माता कंपनी इंटेल की तकनीकी टीम के साथ मिलकर इस पावरफुल सर्वर को तैयार किया है। इसमें इंटेल का सबसे आधुनिक प्रोसेसर लगा है।
हिमालय के रणनीतिक दर्रे पर रखा गया है इसका नाम
इस स्वदेशी सर्वर का नाम ‘नाथू ला’ रखने के पीछे भी एक बहुत ही खास और बड़ी वजह है। दरअसल यह नाम हिमालय के मशहूर और अत्यंत रणनीतिक पहाड़ी दर्रे के नाम पर रखा गया है, जो इसकी जबरदस्त मजबूती और अभेद्य सुरक्षा को बहुत स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
जोहो कंपनी इस उन्नत सर्वर को बाजार में व्यावसायिक रूप से बेचेगी नहीं। वह इसका उपयोग खुद के 16 ग्लोबल डेटा सेंटर्स में आंतरिक रूप से करेगी। कंपनी का मानना है कि कंप्यूटिंग के इस दौर में अपनी मुख्य हार्डवेयर तकनीक पर अपना नियंत्रण होना सबसे ज्यादा जरूरी है।
डेटा सेंटर संचालन में बिजली की होगी भारी बचत
जोहो ने फिलहाल ऐसे कुछ सौ सर्वर परिचालन में तैनात कर दिए हैं। इस चालू वर्ष के अंत तक इनकी संख्या बढ़कर 2000 तक पहुंच जाएगी। वर्तमान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा सेंटर्स को चलाने में सबसे बड़ा खर्च बिजली की खपत और इंफ्रास्ट्रक्चर के रख-रखाव का आता है।
जोहो के मुताबिक यह नया नाथू ला सर्वर किसी भी आम सर्वर की तुलना में लगभग 12 से 18 प्रतिशत तक कम बिजली खाएगा। इसके अलावा इस स्वदेशी तकनीक की मदद से सर्वर के रख-रखाव की कुल लागत में भी लगभग 20 से 30 फीसदी की बड़ी बचत होगी।
ग्लोबल टेक मार्केट के लिए गेमचेंजर बनेगा भारतीय सर्वर
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बूम के कारण वैश्विक बाजार में सर्वर के दाम पहले ही तीन से चार गुना तक काफी बढ़ चुके हैं। ऐसे कठिन समय में जोहो का यह पूरी तरह घरेलू स्तर पर निर्मित सर्वर वैश्विक तकनीकी बाजार के लिए एक बड़ा गेमचेंजर साबित होने वाला है।
इस प्रोजेक्ट की सफलता ने साबित कर दिया है कि भारत के छोटे शहरों के युवाओं में भी वैश्विक स्तर की तकनीक विकसित करने की पूरी क्षमता है। जोहो का यह प्रयास देश को डिजिटल हार्डवेयर के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
Author: Mohit


