New Delhi News: भारत के बेहद दुर्गम पहाड़ी इलाकों में अब आपदाओं से डरने की जरूरत नहीं है। देश के पहले माउंटेन और एवलांच रेस्क्यू (TMR) संगठन ने बड़ा कमाल किया है। हेमंत सचदेवा के नेतृत्व में इस टीम ने 400 से ज्यादा सैनिकों की जान बचाई है। सेना और नागरिकों की सुरक्षा का एक नया और मजबूत ढांचा तैयार हुआ है।
हेमंत सचदेवा ने अपनी दूरदर्शी सोच से भारत की आपदा तैयारियों को पूरी तरह बदल दिया है। उन्होंने नागरिक विशेषज्ञता और सैन्य ताकत को मिलाकर एक नया सुरक्षा चक्र बनाया है। पिछले एक दशक में उनकी टीम ने सैकड़ों बेशकीमती जानें बचाई हैं। सीमावर्ती और ऊंचाई वाले खतरनाक इलाकों में अब बचाव कार्य काफी तेज और सुरक्षित हो गए हैं।
हिमस्खलन से होने वाली मौतों का आंकड़ा हुआ शून्य
उत्तरी सीमाओं पर TMR ने पिछले दस वर्षों में ऐतिहासिक सफलताएं पाई हैं। खतरनाक इलाकों में 16 विशेष बचाव दल लगातार तैनात हैं। इन टीमों ने लगभग 400 सैनिकों को मौत के मुंह से निकाला है। वर्ष 2017 में हिमस्खलन से 38 जवानों की मौत हुई थी। आधुनिक तकनीक से यह आंकड़ा 2024 में घटकर शून्य हो गया है।
पहाड़ों में बाढ़, भूस्खलन और हिमस्खलन जैसी भयानक आपदाओं में टीम हमेशा आगे रही है। साल 2022 में माउंट त्रिशूल अभियान और मणिपुर भूस्खलन में इन्होंने बेहतरीन काम किया। इसके बाद 2023 में सिक्किम की ग्लेशियर बाढ़ में लोगों को बचाया। हाल ही में 2024 में केरल के वायनाड की भीषण बाढ़ में भी कई जानें बचाईं।
भारतीय सेना के साथ ऐतिहासिक समझौता
सैन्य और नागरिक विशेषज्ञता को मजबूत करने के लिए हेमंत सचदेवा ने बड़े कदम उठाए हैं। उन्होंने भारतीय सेना की उत्तरी, पूर्वी और मध्य कमांड के साथ अहम समझौते किए। सितंबर 2024 में सेना मुख्यालय के साथ एक ऐतिहासिक समझौता हुआ। इस शानदार साझेदारी ने भारत की सुरक्षा और बचाव प्रणाली को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत बना दिया है।
TMR का असर केवल सेना तक ही सीमित नहीं है। यह संगठन आम नागरिकों के लिए विशेष आपदा प्रतिक्रिया और प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाता है। इससे स्थानीय प्रशासन को संकट में आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलती है। जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ रही आपदाओं से निपटने के लिए हेमंत सचदेवा के ये प्रयास देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित हुए हैं।
Author: Gaurav Malhotra


