Delhi News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी को एक खास ‘मेलोडी’ टॉफी गिफ्ट की है। इस दिलचस्प वाकये के बाद से ही पूरे इंटरनेट पर सिर्फ इसी की चर्चा हो रही है। यह पहली बार नहीं है जब पीएम मोदी ने किसी खाने की चीज को मशहूर किया है।
प्रधानमंत्री मोदी की वैश्विक लोकप्रियता का अंदाजा आप आसानी से लगा सकते हैं। वह सार्वजनिक रूप से जिस भी पारंपरिक चीज को एक बार खा लेते हैं, वह चीज अपने आप ही पूरी दुनिया में मशहूर होने लगती है। उनके चखते ही कई क्षेत्रीय व्यंजनों की किस्मत रातों-रात पूरी तरह बदल गई।
बंगाल चुनाव के दौरान झालमुरी का वो यादगार स्वाद
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के व्यस्त प्रचार के दौरान पीएम मोदी अचानक झारग्राम की एक छोटी सी दुकान पर रुके थे। वहां उन्होंने स्थानीय पसंदीदा स्नैक ‘झालमुरी’ का स्वाद लिया था। कैमरे के सामने उनके झालमुरी खाते ही यह बंगाली डिश अचानक सोशल मीडिया पर जबरदस्त तरीके से वायरल हो गई थी।
इसी तरह दिल्ली के हुनर हाट कार्यक्रम के दौरान भी एक बेहद दिलचस्प नजारा देखने को मिला था। वहां प्रधानमंत्री मोदी ने खुद आगे बढ़कर बिहार के पारंपरिक ‘लिट्टी-चोखा’ का भरपूर आनंद लिया था। इसके बाद देश के कोने-कोने में लोग इस शुद्ध देसी खाने के दीवाने हो गए थे।
बनारस की गलियों में चाय की चुस्की और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति
पीएम मोदी और कड़क चाय के बीच हमेशा से एक बेहद अनूठा और पुराना रिश्ता रहा है। मार्च 2022 में चुनावी अभियान के दौरान वह बनारस की एक बेहद प्रसिद्ध चाय की दुकान पर रुके थे। वहां कुल्हड़ में चाय पीते हुए उनकी तस्वीरें पूरी दुनिया की नजरों में छा गई थीं।
वैसे तो हम सभी भारतीय आदतन चाय से बेहद गहरा लगाव और सच्चा प्रेम रखते हैं। लेकिन पीएम मोदी ने इस पेय को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का एक बड़ा जरिया बना दिया है। वह फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग जैसे बड़े वैश्विक नेताओं के साथ भी चाय पी चुके हैं।
काशी का मशहूर बनारसी पान और श्री अन्न की गूंज
बनारस का प्रसिद्ध पान वैसे तो अपने लाजवाब स्वाद के लिए सदियों से हर जगह काफी विख्यात रहा है। लेकिन जब पीएम मोदी ने खुद चुनाव प्रचार के दौरान इसे खाया, तो इसकी ख्याति एक अलग ही स्तर पर पहुंच गई। उन दिनों हर तरफ सिर्फ बनारसी पान का ही जिक्र हो रहा था।
व्यंजनों के अलावा पीएम मोदी जहां भी जाते हैं, वहां की स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने देश-विदेश में ‘श्री अन्न’ (मोटा अनाज) और साधारण खिचड़ी को वैश्विक मंच पर एक नई पहचान दी है। अब मेलोनी को दी गई मेलोडी टॉफी भी इसी लिस्ट में नया नाम बन चुकी है।
Author: Harikarishan Sharma


